कोर्ट ने कहा- यदि सरकारी तंत्र विफल होता है, तो हम सोचेंगे क्या किया जा सकता है नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपनी पूर्ण एवं असीमित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर कार्य में जुटे सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले से संबंधित मामलों को एनआईए को ट्रांसफर कर दिया है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नौकरशाही की विश्वसनीयता कम की जा रही है और सचिवालय एवं सरकारी कार्यालयों में राजनीति घुसाई जा रही है। पीठ ने आदेश दिया कि राज्य पुलिस द्वारा मालदा घटना से जुड़े 26 गिरफ्तार व्यक्तियों से एनआईए द्वारा पूछताछ की जाए, भले ही वे न्यायिक हिरासत में क्यों न हों। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुश्यंत नरियाला को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्होंने एक अप्रैल को कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की कॉल उस वक्त नहीं उठाई, जब न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक पीठ ने मुख्य सचिव से कहा कि उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कॉल न उठाने के लिए माफी मांगनी चाहिए और कहा कि यह जिला प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। कोर्ट ने कहा कि मालदा में एसआईआर कार्य में जुटे न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेरे जाने की घटना वास्तव में पूर्व-नियोजित और किसी विशेष उद्देश्य से प्रेरित थी। इस पर मुख्य सचिव ने कोर्ट के सामने माफी मांगी। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी की ओर से हलफनामा भी दाखिल किया गया। जांच एजेंसी के द्वारा कोर्ट को बताया कि इस मामले में अब तक 24 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अब तक 309 संदिग्धों की पहचान हुई है। इसके साथ ही करीब 432 लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड के विश्लेषण की मांग की गई है। उसके बाद तफ्तीश का दायरा और आगे बढ़ाया जाएगा। न्यायालय ने चुनावी राज्य में हुई हालिया घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह भी कहा कि केंद्रीय बल तैनात रहेंगे। सीजेआई ने कहा कि जिस तरह से अतीत में हालात रहे हैं, उसे देखते हुए पश्चिम बंगाल से केंद्रीय बलों को वापस नहीं बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी तंत्र विफल होता है, तो हम सोचेंगे कि क्या किया जा सकता है। पीठ ने गौर किया कि मालदा जिले में भी जहां न्यायिक अधिकारियों को घेराव समेत कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ा। सुनवाई के दौरान पीठ ने अधिकरणों के प्रभावी और निष्पक्ष रूप से कार्य करने के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की जरुरत पर बल दिया। न्यायमूर्ति बागची ने इस बात पर जोर दिया कि निर्वाचन आयोग की भूमिका चुनावी भागीदारी को सीमित करने के बजाय उसे बढ़ाने की है। सिराज/ईएमएस 07अप्रैल26