एनआईए की जांच में हुआ खुलासा, मस्जिद से ऐलान कर लोगों को बुलाया नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1 अप्रैल को हुए जजों के घेराव को लेकर एनआईए की शुरुआती जांच रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में पेश इस रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना अचानक भड़की भीड़ का नतीजा नहीं थी, बल्कि इसे एक सुनियोजित और संगठित तरीके से अंजाम दिया गया था, जिसकी शुरुआत स्थानीय स्तर पर किए गए एक ऐलान से हुई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। जांच एजेंसी के मुताबिक इलाके में एक मस्जिद से ऐलान कर लोगों को बुलाया गया, इन अपीलों का असर यह हुआ कि कुछ ही समय में करीब 1500 लोगों की भीड़ बीडीओ ऑफिस के बाहर जमा हो गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। यही वह बिंदु था, जहां से मामला विरोध प्रदर्शन से आगे बढ़कर जजों के घेराव में बदल गया1 रिपोर्ट के मुताबिक इस भीड़ ने कलियाचक-2 बीडीओ कार्यालय में मौजूद सात न्यायिक अधिकारियों को 13 घंटे से ज्यादा समय तक घेरकर रखा। अधिकारियों को न केवल काम करने से रोका गया, बल्कि उन्हें बाहर निकलने की भी अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान एक महिला न्यायिक अधिकारी को करीब आठ घंटे तक रोककर रखा गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कार्रवाई किसी एक स्थान तक सीमित नहीं थी, बल्कि अलग-अलग जगहों पर सुनियोजित तरीके से बाधाएं खड़ी की गई थीं। जांच एजेंसी ने अपने शुरुआती निष्कर्षों में कई ऐसे संकेतों की ओर इशारा किया है, जो इस पूरे घटनाक्रम को पूर्व-नियोजित साजिश बताते हैं। भीड़ में महिलाओं को आगे रखा गया था, जबकि पुरुष पीछे से गतिविधियों को नियंत्रित कर रहे थे। इसके अलावा, बीडीओ कार्यालय में लगे 16 सीसीटीवी कैमरों में से 9 बंद पाए गए, जिनमें मुख्य प्रवेश द्वार के कैमरे भी शामिल थे। इस तरह की स्थिति ने जांच एजेंसी के संदेह को और मजबूत किया है कि यह सब पहले से तय योजना के तहत किया गया। इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि यह कोई सामान्य भीड़ का उग्र व्यवहार नहीं था, बल्कि एक ‘प्रेरित और योजनाबद्ध’ घटना थी। अदालत ने राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा न जताते हुए इस मामले से जुड़ी सभी एफआईआर एनआईए को सौंपने का आदेश दिया है। फिलहाल, इस मामले में 100 से ज्यादा लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें से 24 की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल शुरुआत है और इसके पीछे की बड़ी साजिश व अन्य शामिल लोगों की पहचान अभी बाकी है। एनआईए को आगे की जांच के दौरान नई एफआईआर दर्ज करने और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की भी छूट दी गई है। यही वजह है कि अब इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है और इसकी जांच भी उसी स्तर पर आगे बढ़ रही है। सिराज/ईएमएस 07अप्रैल26 ----------------------------------