राष्ट्रीय
07-Apr-2026


कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा कोलकाता को निशाना बनाने की धमकी ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है। सिलीगुड़ी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने गरजते हुए कहा कि यदि केंद्र में इंडिया गठबंधन की सरकार आती है, तो वे दुश्मनों को उनके घर में घुसकर मारेंगे। विवाद की शुरुआत पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने सियालकोट में बोलते हुए कहा था कि भारत की किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब तेज और सटीक होगा। इस दौरान उन्होंने बिना किसी आधार के कोलकाता को संभावित निशाना बनाने की बात कही थी। अभिषेक बनर्जी ने इस धमकी पर केंद्र सरकार की चुप्पी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने एक कागज पर पाकिस्तानी मंत्री का नाम लिखकर दिखाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सवाल किया कि वे इस गंभीर मुद्दे पर मौन क्यों हैं? अभिषेक ने तंज कसते हुए पूछा, प्रधानमंत्री कूचबिहार में चुनाव प्रचार कर रहे हैं, लेकिन कोलकाता पर आए खतरे पर एक शब्द नहीं बोल रहे। क्या यही आपका 56 इंच का सीना है? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सेना और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए करती है, जबकि विदेशी दुश्मनों के खिलाफ कोई कड़ा स्टैंड नहीं लिया जा रहा। वहीं, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी अलग रैली में केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि क्या बंगालियों की जान की कोई कीमत नहीं है? उन्होंने सवाल किया कि क्या बंगाल को केवल वोटों के लिए इस्तेमाल किया जाता है और खतरे के समय उसे अकेला छोड़ दिया जाता है? यह तनाव दरअसल पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम हमले और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद से लगातार बना हुआ है। अभिषेक बनर्जी के इस घर में घुसकर मारने वाले बयान पर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। जहां विपक्षी दल इसे बेहद उत्तेजक मान रहे हैं, वहीं टीएमसी इसे राज्य की सुरक्षा और स्वाभिमान के लिए उठाया गया मजबूत कदम बता रही है। केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चुनावी माहौल में इस विवाद ने राष्ट्रवाद और सुरक्षा के मुद्दे को केंद्र में ला खड़ा किया है। वीरेंद्र/ईएमएस/07अप्रैल2026