राष्ट्रीय
07-Apr-2026


कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संदर्भ में नंदीग्राम से एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है, जहां वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है, लेकिन हटाए गए नामों में उनकी हिस्सेदारी 95.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके विपरीत, लगभग 75 प्रतिशत गैर-मुस्लिम आबादी के बीच नाम हटाने के मामले मात्र 4.5 प्रतिशत दर्ज किए गए हैं। एक पब्लिक पॉलिसी संस्था द्वारा किए गए विश्लेषण में चुनाव आयोग के सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट डेटा का अध्ययन किया गया। सात अलग-अलग सूचियों की जांच में सामने आया कि कई मामलों में हटाए गए नामों में मुसलमानों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से लेकर 98 प्रतिशत तक रही। यह आंकड़े आबादी के अनुपात से काफी अलग तस्वीर पेश करते हैं और प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि, एक सूची में अपवाद भी देखने को मिला। ‘लिस्ट 4ए’ में हटाए गए सभी नाम गैर-मुस्लिम महिलाओं के थे, जिसमें किसी भी मुस्लिम मतदाता का नाम शामिल नहीं था। इस तरह के अलग-अलग पैटर्न समग्र स्थिति को और जटिल बनाते हैं। दिसंबर 2025 के एक अन्य डेटा सेट में भी मुसलमानों की हिस्सेदारी नाम हटाने के मामलों में 33.3 प्रतिशत पाई गई, जो उनके जनसंख्या अनुपात से अधिक है, हालांकि यह अंतर सप्लीमेंट्री सूची की तुलना में कम है। पूरे घटनाक्रम पर अब तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रभावित मतदाताओं को ट्रिब्यूनल में अपील करने का विकल्प जरूर दिया गया है, लेकिन पारदर्शिता को लेकर बहस जारी है। वीरेंद्र/ईएमएस/07अप्रैल2026