राष्ट्रीय
07-Apr-2026


मालदा कांड की जांच सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को सौंपी नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल के मालदा कांड पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगा दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि घटना वाले दिन कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन तक नहीं उठाया गया, जो बंगाल में प्रशासन की गंभीर विफलता को दिखाता है। सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी कर पूछा, क्या आप चीफ जस्टिस का फोन भी नहीं उठा सकते? और मुख्य सचिव से इस पर माफी मांगने को कह दिया। यह मामला 1 अप्रैल को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) ड्यूटी के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को घंटों घेरकर रखने और बंधक बनाने की घटना से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीर मानकर जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की, फोन शाम को आते। अगर आपने अपने मोबाइल नंबर दिया होता, तब मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय प्रशासन को बहुत मदद मिलती। जब मुख्य सचिव ने कहा कि उनका नंबर उपलब्ध है, तब न्यायमूर्ति बागची ने तीखी प्रतिक्रिया देकर कहा कि आप इतने ऊंचे पद पर नहीं हो सकते कि मुख्य न्यायाधीश आपसे संपर्क न कर सकें। कृपया अपना पद इतना नीचे लाएं कि सीजेआई आपसे संपर्क कर सकें। मुख्य न्यायाधीश ने मुख्य सचिव और डीजीपी दोनों को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से लिखित माफी मांगने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि आपको माफी मांगनी चाहिए, यह आपके नागरिक प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की घोर विफलता है कि हमें न्यायिक अधिकारियों को शक्तियां देनी पड़ीं। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने गौर किया कि मुख्य सचिव से संपर्क करने के लिए घंटों के प्रयासों के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, जबकि घटना के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया था। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, नौकरशाही इसी तरह काम करती है! इस राज्य में अराजकता फैली हुई है। स्थिति की गंभीरता को रेखांकित कर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घटना दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुई, लेकिन उन्हें इसकी सूचना रात 11:30 बजे ही मिली। उन्होंने कहा, तब तक क्या-क्या हो सकता था? हजारों लोगों को इकट्ठा होने और इकट्ठा होते रहने की अनुमति दी गई थी। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि इससे भी गंभीर परिणाम को रोकने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी। अदालत ने घटनास्थल पर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी के बारे में दिए गए बयानों का हवाला देकर न्यायमूर्ति बागची ने कहा जब रजिस्ट्री ने एसपी से संपर्क किया, तब वे बस देख रहे थे। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि गिरफ्तार आरोपियों से अब एनआईए पूछताछ करेगी और उनकी हिरासत एजेंसी को सौंपी जाए। राज्य पुलिस को सभी केस डायरी, जांच दस्तावेज और जरूरी लॉजिस्टिक सहायता एनआईए को सौंपने का निर्देश दिया। आशीष दुबे / 07 अप्रैल 2026