नई दिल्ली (ईएमएस)। मोतिहारी मस्जिद से हथियार मिलने के मामले की जांच कर रही बिहार पुलिस और केन्द्रीय जांच एजेंसियों के हाथ बड़ी सफलता लगी है। मामले में पीएफआई की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हो गया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि दो साल बाद फिर पीएफआई के स्लीपर सेल को बिहार झारखंड में सक्रिय करने की साजिश रची जा रही है। इस साजिश में अहम कड़ी आर्म्स रैकेट है, जिसका पर्दाफाश करने के लिए नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी बिहार में 10 जगहों पर छापेमारी कर रही है। केन्द्रीय जांच एजेंसी सूत्रों के मुताबिक इसकी संभावना है कि इसी मस्जिद से कुछ सालों पहले गिरफ्तारी किए गए पीएफआई मास्टर ट्रेनर याकूब के सहयोगी दो साल बाद फिर पीएफआई स्लीपर सेल को सक्रिय करने की योजना पर काम कर रहे थे। बात दें कि याकूब वहीं व्यक्ति है, जो कि इंटरनेट पर भड़काऊ पोस्ट कर अयोध्या में राम मंदिर स्थल पर बाबरी मस्जिद के निर्माण की वकालत कर युवाओं को आतंकवादी प्रशिक्षण देने का आरोप था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि पीएफआई के साथ मदरसे के मौजूदा संपर्कों का इस्तेमाल हो रहा था। इसके साथ यहां से एक और बड़ी साजिश रचने की कोशिश की जा रही थी। केन्द्रीय जांच एजेंसियों को इसके इनपुट मिले हैं कि मोतिहारी मदरसे के अलावा बिहार झारखंड में और भी धार्मिक स्थल भी हो सकते हैं, जहां पर इस तरीके का हथियार इकट्ठा करने का काम हो रहा है। माना जा रहा है कि मुंगेर आर्म्स रैकेट के तार इस बार भी मोतिहारी से ही ये जुड़ते दिख रहे है। आशीष दुबे / 07 अप्रैल 2026