राज्य
08-Apr-2026


जबलपुर, (ईएमएस)। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही अभिभावकों की चिंताएं बढ़ जाती है विशेष कर निजी स्कूलों की मनमानी के कारण हर वर्ष पाठ्यक्रम में बदलाव से पुरानी किताब में बेकार हो जाती है कई किताबें ऐसी होती है जिनका उपयोग पूरे वर्ष कम से कम होता है फिर भी उन्हें खरीदना अनिवार्य कर दिया जाता है इससे न सिर्फ आर्थिक बोझ बढ़ जाता है बल्कि संसाधनों की बर्बादी भी होती है यह बात अल्पसंख्यक कांग्रेस परिवार के वरिष्ठ नेता सरदार दलवीर सिंह जस्सल सुमन कुमार जैन ने जारी एक बयान में व्यक्त करते हुए सरकारी और निजी विद्यालयों में कॉलेज में समान पाठ्यक्रम लागू किए जाने की मांग की है कांग्रेस नेताओं ने आगे कहा कि सरकारी और निजी विद्यालय महाविद्यालय में समान पाठ्यक्रम लागू किए जाने से गत वर्ष की किताबों का उपयोग संभव हो सकेगा प्रशासन को , हर वर्ष एडमिशन फीस, फीस और किताबों की अनमितताओं पर शक्ति से निगरानी रखनी चाहिए महंगी और अनावश्यक किताबों पर नियंत्रण के लिए ठोस नीति बनाए जाने की जरूरत पर बल दिया ताकि शिक्षा का लाभ सुलभ बनाए जा सके| सुनील साहू / मोनिका / 08 अप्रैल 2026/ 04.50