- 39 शिकायतें, 242 पन्नों के सबूत और 15 माह से वेतन लंबित — अब ‘मौत का सत्याग्रह’ पर शिक्षक जल त्याग कर आमरण अनशन पर बैठे धर्मराज तिवारी; बहाली के बाद भी नहीं मिला वेतन, मानसिक उत्पीड़न और विभागीय मनमानी के गंभीर आरोप* सिंगरौली (म.प्र.) | विशेष संवाददाता *प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ अंतिम लड़ाई* सिंगरौली जिले के शिक्षा विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, लापरवाही और उत्पीड़न के खिलाफ अब एक शिक्षक ने आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। चितरंगी विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सूदा में पदस्थ माध्यमिक शिक्षक धर्मराज तिवारी बुधवार दोपहर से कलेक्ट्रेट मुख्य द्वार पर जल त्याग कर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे अनशन स्थल पर ही अपने प्राण त्याग देंगे। *39 शिकायतें, फिर भी नहीं हुई सुनवाई* शिक्षक तिवारी के अनुसार, उन्होंने अब तक 39 बार लिखित शिकायतें विभिन्न प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों को सौंपी हैं। इन शिकायतों के साथ उन्होंने 242 पन्नों के दस्तावेज, ऑडियो एवं वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत किए, लेकिन इसके बावजूद न तो निष्पक्ष जांच शुरू की गई और न ही किसी दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई। यह स्थिति प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। *निलंबन को बताया* *सुनियोजित साजिश* तिवारी का कहना है कि 21 जनवरी 2025 को किया गया उनका निलंबन पूरी तरह पूर्वाग्रह से ग्रसित और सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। उनका आरोप है कि विभागीय भ्रष्टाचार को उजागर करने के कारण उन्हें झूठे एवं कूटरचित आरोपों में फंसाकर प्रताड़ित किया गया। *जांच में आरोप सिद्ध नहीं, फिर भी राहत नहीं* शिक्षक के अनुसार, विभागीय जांच की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं हुआ। इसके बाद 20 मार्च 2025 को उन्हें पुनः सेवा में बहाल कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला और समस्याएं जस की तस बनी रहीं। *15 माह बाद भी वेतन लंबित, आर्थिक संकट गहराया* तिवारी ने बताया कि बहाली के बाद भी जनवरी एवं फरवरी 2025 का वेतन आज तक लंबित है। इसके अलावा निलंबन अवधि के दौरान चार माह तक जीवन निर्वाह भत्ता भी नहीं दिया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। करीब 15 माह बीत जाने के बाद भी वेतन भुगतान को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई। *पुनः विभागीय जांच की धमकी, बढ़ा मानसिक दबाव* शिक्षक ने आरोप लगाया कि अब उन्हें पुनः विभागीय जांच (D.E.) शुरू करने की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने इसे मानसिक उत्पीड़न, अनावश्यक दबाव और प्रताड़ना करार दिया है। साथ ही प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पर अभद्र भाषा का प्रयोग, सेवा समाप्ति की धमकी और बार-बार दूरस्थ स्थानों पर स्थानांतरण जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। *कलेक्ट्रेट गेट बना संघर्ष का केंद्र* बुधवार दोपहर करीब 12 बजे तिवारी अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और वहीं जल त्याग कर आमरण अनशन शुरू कर दिया। अनशन स्थल पर उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि अब यह लड़ाई “आर या पार” की है और पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं है। *उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया मामला* शिक्षक ने अपने आवेदन की प्रतिलिपि भोपाल स्थित प्रमुख सचिव, लोक शिक्षण संचालनालय, रीवा संभाग के कमिश्नर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी है, ताकि मामले में निष्पक्ष हस्तक्षेप हो सके। *मुख्य मांगें* निलंबन आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए निलंबन अवधि को ड्यूटी मानते हुए पूर्ण वेतन दिया जाए लंबित वेतन (जनवरी-फरवरी 2025) का शीघ्र भुगतान किया जाए पुनः विभागीय जांच की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए पूर्व पदस्थापना बहाल की जाए शिक्षक एवं उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए *प्रशासन की चुप्पी बनी चिंता का कारण* इतने गंभीर आरोपों और आमरण अनशन के बावजूद अब तक जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह चुप्पी न केवल प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाती है, बल्कि स्थिति को और अधिक गंभीर बना रही है। *आंदोलन के विस्तार के संकेत* सूत्रों के अनुसार, यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो विभिन्न शिक्षक संगठन इस आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में यह मामला जिला स्तर से उठकर प्रदेश स्तर का मुद्दा बन सकता है। *बड़ा सवाल* 39 शिकायतें, सैकड़ों पन्नों के साक्ष्य, 15 माह से लंबित वेतन और अब अन्य जल त्याग कर आ रिपोर्ट आर एन पाण्डेय