राष्ट्रीय
08-Apr-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत सरकार की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक अभी भी फारस की खाड़ी में भारत के 16 जहाज फंसे हुए हैं। इतना ही नहीं उन भारतीय झंडे वाले जहाजों पर 433 नाविक भी करीब 40 दिनों से फंसे हैं। अब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के युद्ध विराम हो चुका है, इसलिए इनके वहां से जल्द कूच करने की एक नई उम्मीद जगी है। भारतीय जहाजों का अपने देश आना इस पर निर्भर करेगा कि ईरान कितनी जल्दी उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से जाने की अनुमति देता है। आमतौर पर किसी भी मर्चेंट शिप को फारस की खाड़ी से भारत के पश्चिमी तटों पर मौजूद मुंबई, मुंद्रा, कांडला, कोच्चि या मंगलुरु बंदरगाहों तक पहुंचने में तीन से सात दिन लगाते हैं। यह जहाजों के आकार, भार और उनकी स्पीड पर निर्भर करता है। मतलब, जिस दिन से ईरान,ओमान के साथ मिलकर सीजफायर के अनुसार जहाजों को गुजरने की अनुमति देगा, उन्हें भारत पहुंचने में 3 से एक 1 तक का समय लग सकता है। अब सवाल है कि ईरान इसकी शुरुआत कब से करता है, क्योंकि सीजफायर को लेकर उसका जो बयान आया है, उससे साफ है कि वह शर्तों के आधार पर ही इसकी इजाजत देगा, जैसा कि वह पहले करता आया है। दो हफ्तों की अवधि के लिए ईरान की सशस्त्र सेना के साथ समन्वय के द्वारा और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित यात्रा मुमकिन हो सकेगी। मतलब, ईरान का दो टूक कहना है कि सीजफायर के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही शर्तों के आधार पर तय होगी। यह लाइन उसकी नई नहीं है और जब उसने सिर्फ भारत सहित पांच मित्र राष्ट्रों (रूस, इराक, चीन और पाकिस्तान) के जहाजों को गुजरने की घोषणा की थी, तब भी ऐसी ही शर्तें लगाई थीं। जबकि, अमेरिकी राष्ट्रपति और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से सीजफायर की घोषणा के साथ होर्मुज स्ट्रेट खोलने जो दावे किए गए हैं, वहां पूरी तरह से अलग हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की असिस्टेंट और व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने दावा किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवा दिया। इससे पहले जो रिपोर्ट थी, उसके अनुसार ईरान होर्मुज से जहाजों के गुजरने देने के लिए जो प्रोटोकॉल बना रहा है, उसमें कई तरह की शर्तें होनी हैं। इसमें प्रति जहाज 2 मिलियन डॉलर का टोल लेना भी शामिल है। यही नहीं, ईरान चाहता है कि जहाज उसके तट के बिल्कुल नजदीक से गुजरें, ताकि उसकी सेना उसे अपनी आंखों से देखकर उनकी पहचान सुनिश्चित कर सके। मतलब, इन औपचारिकताओं को पूरा किया गया, तब फारस की खाड़ी में जहाजों का ट्रैफिक जाम खुलने में समय लग सकता है। भारतीय जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार फारस की खाड़ी में इस वक्त मौजूद 16 भारतीय जहाजों पर अलग-अलग कार्गो लदा हुआ है। इन जहाजों में एक एलएनजी और दो एलपीजी टैंकर हैं। इनमें से एक एलपीजी टैंकर खाली है। 6 कच्चे तेलों का टैंकर है और उनमें से भी एक टैंकर खाली है। 3 कंटेनर शिप हैं, 1 ड्रेजर और 2 बल्क कंटेनर हैं। 1 जहाज पर केमिकल के प्रोडक्ट लदे हुए हैं। आशीष दुबे / 08 अप्रैल 2026