राष्ट्रीय
08-Apr-2026


मुंबई, (ईएमएस)। दीक्षित सोलंकी के शव की डीएनए जांच को लेकर केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्पष्ट किया है कि उसे इस प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं है। सरकार ने आश्वासन दिया कि डीएनए जांच मुंबई के कलीना स्थित फॉरेंसिक लैब में केंद्र सरकार की निगरानी में कराई जाएगी। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लेते हुए केंद्र सरकार को डीएनए जांच की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सोलंकी परिवार की याचिका का निपटारा कर दिया गया। केंद्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील रूई रोड्रिक्स ने अदालत को बताया कि डीएनए जांच को लेकर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान शव का सम्मान बनाए रखा जाएगा और माहीम स्थित शवगृह से अत्यंत सावधानी के साथ शव को कलीना लैब में भेजा जाएगा। परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। बता दें कि दीक्षित सोलंकी के परिवार ने शव को स्वीकार करने से पहले डीएनए जांच की मांग की थी। परिवार का कहना है कि लंबी देरी के कारण उन्हें संदेह है कि जो अवशेष भारत लाए गए हैं, वे वास्तव में दीक्षित सोलंकी के ही हैं या नहीं। परिवार ने साफ कहा कि जब तक डीएनए जांच पूरी नहीं होती, वे शव अपने कब्जे में नहीं लेंगे। बहरहाल हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब डीएनए जांच की प्रक्रिया जल्द पूरी होने की उम्मीद है, जिससे परिवार को अपने बेटे के शव की पहचान को लेकर स्पष्टता मिल सकेगी। * क्या है मामला? पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान 4 मार्च को ओमान के पास एक तेलवाहक जहाज एमटी एमकेडी व्योम पर ड्रोन हमला हुआ था। इस हमले में 25 वर्षीय भारतीय क्रू सदस्य दीक्षित सोलंकी की मौत हो गई थी। जहाज मस्कट के तट से करीब 52 नॉटिकल मील दूर था, जब इंजन रूम में आग लग गई। इस घटना के करीब 35 दिन बाद 5 अप्रैल को दीक्षित सोलंकी का शव मुंबई एयरपोर्ट पर लाया गया। लेकिन परिवार ने शव की पहचान को लेकर संदेह जताते हुए उसे लेने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट में याचिका दायर की। दीक्षित के पिता अमृतलाल सोलंकी और बहन मिताली ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि अंतिम संस्कार करना उनका मूल अधिकार है, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण उन्हें अपने बेटे का शव समय पर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने अदालत से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की थी। संजय/संतोष झा-०८ अप्रैल/२०२६/ईएमएस