राष्ट्रीय
08-Apr-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रह सकती है। निजी मौसम एजेंसी ने इस साल के मानसून का पूर्वानुमान जारी कर दिया है। इसके अनुसार, बारिश सामान्य से 6 प्रतिशत कम रह सकती है। जून से सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में देश में बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिलीमीटर है। सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि बारिश 90 प्रतिशत से 95 प्रतिशत के बीच रहेगी। मौसम एजेंसी ने 94 प्रतिशत बारिश का अनुमान दिया है। मौसम एजेंसी के मुताबिक, जून में सामान्य बारिश होगी, लेकिन जुलाई से गिरावट शुरू होकर अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ेगा। खासकर अगस्त-सितंबर में बारिश की कमी ज्यादा रहने के संकेत हैं। मध्य और पश्चिम भारत के मुख्य क्षेत्रों में बारिश कम रहने के आसार हैं। अगस्त-सितंबर में मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सामान्य से कम बारिश की आशंका है। क्या होता है लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी एलपीए इसका मतलब है कि मौसम विभाग ने 1971-2020 की अवधि के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) को 87 सेमी (870 मिमी) निर्धारित किया है। अगर किसी साल की बारिश 87 सेमी से ज्यादा होती है, तो उसे सामान्य से अधिक माना जाता है। अगर कम होता कमजोर मानसून माना जाता है। जानकार ने कहा कि मानसून की शुरुआत के समय अल-नीनो बनने की संभावना है। इससे मानसून कमजोर पड़ सकता है। हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) मजबूत हो, तब अल-नीनो का असर कुछ कम होता है। अभी आईओडी सामान्य या थोड़ा अधिक रहने की उम्मीद है। इससे मानसून की शुरुआत ठीक होगी, लेकिन सीजन के दूसरे हिस्से में बारिश कमजोर पड़ने का खतरा रहेगा। आशीष दुबे / 08 अप्रैल 2026