राष्ट्रीय
09-Apr-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। आम आदमी पार्टी (आप) और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच बढ़ती दूरियां अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हैं। पार्टी की ओर से की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई और चड्ढा के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। हर किसी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या राघव चड्ढा आप से नाता तोड़कर अपनी नई राह चुनेंगे। हाल ही में राघव चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक रील शेयर की, जिसने उनके भविष्य की योजनाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। इस रील में एक सोशल मीडिया क्रिएटर ने सुझाव दिया है कि चड्ढा को अब अपनी खुद की पार्टी बना लेनी चाहिए, जिसे जेन-जी पार्टी जैसा कोई नाम दिया जा सकता है। क्रिएटर का तर्क है कि किसी दूसरी पार्टी में जाने के बजाय अपनी पार्टी बनाने से उन्हें युवाओं का एकतरफा समर्थन मिलेगा। चड्ढा ने इस रील को दिलचस्प विचार करार देते हुए साझा किया है, जिसे उनके संभावित विद्रोह के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विवाद की जड़ें पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष में छिपी हैं। करीब एक हफ्ते पहले, आप ने चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त कर दिया था। इसके साथ ही उन पर संसद में पार्टी कोटे से बोलने पर भी रोक लगा दी गई। पार्टी नेताओं—अतिशी और सौरभ भारद्वाज—ने चड्ढा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें बीजेपी के प्रति नरम रुख अपनाना, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना और अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान उनकी अनुपस्थिति जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। अतिशी ने तो सीधे तौर पर सवाल किया कि क्या चड्ढा प्रधानमंत्री मोदी से सवाल करने में डरते हैं? इन आरोपों के बीच राघव चड्ढा ने एक बेहद सांकेतिक संदेश साझा किया। उन्होंने रॉबर्ट ग्रीन की प्रसिद्ध पुस्तक की तस्वीर पोस्ट की, जिसका पहला अध्याय है—नेवर आउटशाइन द मास्टर (अपने गुरु से अधिक मत चमको)। चड्ढा का यह पलटवार इशारा करता है कि पार्टी के भीतर उनकी बढ़ती लोकप्रियता ही शायद उनके खिलाफ हुई कार्रवाई का असली कारण है। फिलहाल, चड्ढा ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके दिलचस्प विचार ने यह साफ कर दिया है कि वह खामोश बैठने के मूड में नहीं हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/09अप्रैल2026