09-Apr-2026
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- गुरु घासीदास नेशनल पार्क में टाइगर मौत मामले पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य के एक्शन प्लान पर पीआईएल समाप्त बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गुरु घासीदास नेशनल पार्क में टाइगर की संदिग्ध मौत और शिकार की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेते हुए दायर जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत विस्तृत कार्ययोजना पर संतोष जताते हुए उम्मीद जताई कि वन विभाग सख्ती से इसका पालन करेगा। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने पारित किया। कैसे शुरू हुआ मामला यह पूरा मामला एक प्रकाशित खबर के आधार पर शुरू हुआ। खबर में गुरु घासीदास पार्क में टाइगर की मौत, जहर या बदले की भावना से हत्या की आशंका जताई गई थी। इसके बाद कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर वन विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। वन विभाग ने क्या बताया 19 दिसंबर 2025 को विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित। अवैध तार, फंदे और करंट से शिकार रोकने पर फोकस। एनजीओ, बिजली विभाग और कानूनी विशेषज्ञों की भागीदारी। 5726 किमी जंगल में पैदल गश्त, सैकड़ों अवैध तार, फंदे और उपकरण जब्त। कई जगह लाइव करंट वाले तार हटाए गए। खैरागढ़ में तेंदुआ शिकार मामले में 7 आरोपी गिरफ्तार किए गए। टाइगर और अन्य वन्यजीवों के अंग बरामद हुए। ओडिशा के साथ संयुक्त रणनीति और बैठक की गई। वन, बिजली और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम बनी। 2490 में से 1781 लूज वायर पॉइंट ठीक किए गए। ड्रोन, कैमरा ट्रैप और स्निफर डॉग का उपयोग किया जा रहा। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी की ला रही। ग्रामीण और आदिवासी समुदाय को जोड़ा गया। शिकार रोकने के लिए सामाजिक भागीदारी बढ़ाई गई। कोर्ट की अहम टिप्पणी हाईकोर्ट ने कहा कि, राज्य ने शिकार रोकने के लिए ठोस और बहु-स्तरीय कदम उठाए हैं। अब इन उपायों का सख्ती से पालन जरूरी है। वन्यजीव संरक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। कोर्ट ने राज्य की कार्ययोजना को रिकॉर्ड पर लिया और पीआईएल का निपटारा किया। साथ ही वन विभाग को निर्देश दिए कि, टाइगर, हाथी सहित सभी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। मनोज राज 09 अप्रैल 2026