क्षेत्रीय
09-Apr-2026
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- ज्वेलर्स सहित मुख्य आरोपियों पर ईओडब्ल्यू ने कसा शिकंजा जबलपुर, (ईएमएस)। बैंक ऑफ महाराष्ट्र में नकली सोना रखकर 13.58 लाख रुपए का लोन लेने के मामलें में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्लयू) ने दो मुख्य आरोपियों सहित दो ज्वेलर्स के विरुद्ध धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है| दरअसल आरोपियों और ज्वेलर्स ने सुनियोजित तरीके से यह धोखाधड़ी की, पहले छोटा लोन लेकर अपनी रेपोटेशन बनाई और बड़ी राशि का लोन लेकर चपत लगाई| वार्षिक जांच में जब खुलासा हुआ तो बैंक की ओर से शिकायत की गई। ईओडब्ल्यू पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार भीमनगर निवासी सौरभ चौधरी ने इस पूरी साजिश की शुरुआत जून 2023 में की थी। उसने बैंक ऑफ महाराष्ट्र जीएस कॉलेज शाखा से सबसे पहले 3.73 लाख रुपये का गोल्ड लोन लिया और उसका समय पर भुगतान कर दिया। इस लेनदेन से बैंक अधिकारियों का उस पर भरोसा जम गया। इसी साख का लाभ उठाते हुए उसने 30 जून 2023 को फिर से बैंक में गोल्ड लोन के लिए आवेदन किया। इस बार उसने दो अलग-अलग किस्तों में 4.79 लाख और 8.78 लाख रुपये के ऋण की मांग की। बैंक ने प्रक्रिया के तहत जब जेवरों का मूल्यांकन कराया तो वहां मौजूद पैनल के ज्वेलर्स ने इसे असली करार दिया। इस धोखाधड़ी में सिद्धेश्वरी ज्वेलर्स के संचालक आशुतोष सराफ और सौम्या ज्वेलर्स के संचालक अनिल सोनी की भूमिका संदिग्ध पाई गई। बैंक की नियमावली के अनुसार इन दोनों ज्वेलर्स को गिरवी रखे जाने वाले सोने की शुद्धता जांचनी थी। आरोपियों ने आपसी मिलीभगत करते हुए नकली जेवरों को असली बताते हुए उनकी फर्जी मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट के आधार पर बैंक ने कुल 13.58 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर दिया। जांच में यह भी पाया गया कि लोन की राशि बैंक खाते में आते ही उसी दिन 4.56 लाख रुपये अचिन उरमलिया के एक नए बैंक खाते में भेज दिए गए थे। धोखाधड़ी के इस मामले का खुलासा फरवरी 2025 में हुआ जब भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय के वरिष्ठ प्रबंधक धीरज कुमार वार्षिक निरीक्षण के लिए जबलपुर पहुंचे। रैंडम जांच के दौरान जब संदेह होने पर संबंधित पैकेटों को खोलकर अन्य अधिकृत ज्वेलर्स से दोबारा जांच कराई गई, तो सभी जेवर नकली निकले। बाजार में इन जेवरों की कीमत शून्य पाई गई। ईओडब्ल्यू की विस्तृत जांच में सौरभ चौधरी, अचिन उरमलिया, अनिल सोनी और आशुतोष सराफ के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2), 336(3) और 340(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया है। सुनील साहू / मोनिका / 09 अप्रैल 2026/ 05.57