पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने दी आंदोलन की चेतावनी 262 दुकानदारों के पुनर्वास की मांग बालाघाट (ईएमएस). भटेरा रेलवे क्रॉसिंग में ओवरब्रिज निर्माण को लेकर मुआवजा वितरण में कथित पक्षपात का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने गुरुवार को मौके पर पहुंचकर रहवासियों की समस्याएं सुनीं और मुआवजा प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं के आरोप लगाए। प्रभावित लोगों ने प्रशासन पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और उचित मुआवजा देने की मांग की है। भटेरा चौकी क्षेत्र में प्रस्तावित ओवरब्रिज निर्माण के चलते प्रभावित हो रहे दुकानदारों और मकान मालिकों में मुआवजा राशि को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने क्षेत्र का दौरा कर स्थानीय लोगों से चर्चा की, जिसमें कई गंभीर शिकायतें सामने आईं। रहवासियों का कहना है कि मुआवजा वितरण में एकरूपता नहीं रखी जा रही है। वार्ड क्रमांक 11 को ग्रामीण क्षेत्र मानते हुए करीब 1100 रुपए की दर निर्धारित की गई है, जबकि उससे सटे वार्ड क्रमांक 10 को शहरी मानकर 2200 रुपए की दर से मुआवजा तय किया गया है। लोगों का सवाल है कि जब दोनों वार्ड नगर पालिका क्षेत्र में आते हैं और समान रूप से टैक्स अदा करते हैं, तो फिर यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है। नोटिस में नहीं है स्पष्ट वार्डवासियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस मद में कितनी राशि दी जा रही है। आरोप है कि व्यावसायिक (कमर्शियल) जमीन का मुआवजा भी आवासीय श्रेणी में दिया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। इससे प्रभावित दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। स्थानीय लोगों ने भू-अर्जन अधिकारी एवं एसडीएम गोपाल सोनी को तत्काल हटाने की मांग उठाई है और निष्पक्ष तरीके से पुनर्मूल्यांकन कर मुआवजा राशि देने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन अनुसार हो मुआवजा वितरण पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने कहा कि मुआवजा वितरण सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार होना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी मांग की कि जिन करीब 262 दुकानदारों को हटाया जाना है, उनके लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। इसके लिए इतवारी बाजार स्थित कॉम्प्लेक्स में पुनर्वास का प्रस्ताव रखा गया है। मुंजारे ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से मुआवजा वितरण नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे और जरूरत पडऩे पर न्यायालय की शरण भी ली जाएगी। भानेश साकुरे / 09 अप्रैल 2026