काहिरा (ईएमएस)। समुद्री इतिहास में कई जहाजों के साथ डूबे खजानों की कहानियां दर्ज हैं, लेकिन एसएस इजिप्ट की कहानी सबसे अनोखी है। वर्ष 1922 में अटलांटिक महासागर में डूबे जहाज से न केवल टनों सोना-चांदी मिला, बल्कि हैदराबाद स्टेट के लिए छपे हजारों करेंसी नोट भी बरामद हुए, जिन्होंने दुनिया को चौंका दिया। 1897 में निर्मित यह विशाल स्टीमशिप 19 मई 1922 को लंदन से मुंबई के लिए रवाना हुआ था। जहाज में 294 क्रू सदस्य और 44 यात्री सवार थे। इसके स्ट्रॉन्ग रूम में करीब 7 टन सोना, 43 टन चांदी और लाखों सोने के सिक्के रखे थे। इसके अलावा, मीर उस्मान अली खान के आदेश पर छपे करीब 1.65 लाख बैंकनोट भी जहाज में मौजूद थे, जिनकी कुल कीमत उस समय 51 लाख रुपये से अधिक थी। ये नोट ‘उस्मानिया सिक्का’ के रूप में हैदराबाद स्टेट में चलन में लाए जाने थे और इन्हें लंदन की प्रसिद्ध प्रिंटिंग कंपनी वाटरलू एंड संस ने तैयार किया था। 20 मई 1922 को फ्रांस के तट के पास घने कोहरे में एसएस इजिप्ट की टक्कर फ्रांसीसी जहाज एसएससाइन से हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि जहाज में बड़ा छेद हो गया और वह मात्र 20 मिनट में समुद्र में समा गया। हादसे में करीब 100 लोगों की जान चली गई, जबकि 250 लोगों को बचा लिया गया। जहाज करीब 400 फीट गहराई में डूबा रहा। साल 1929 में इतालवी बचाव कंपनी सोरिमा ने कमांडर के नेतृत्व में खोज अभियान शुरू किया। 1932 में गोताखोर जहाज के खजाने तक पहुंचने में सफल रहे। उन्हें वहां सोने की ईंटें, चांदी के ढेर और बिखरे हुए सोने के सिक्के मिले। यह खजाना इतना विशाल था कि इस समुद्री इतिहास की सबसे बड़ी रिकवरी में गिना गया। खजाने के बीच से कीचड़ में लिपटे कागजों के बंडल भी मिले। जब इन्हें साफ किया गया, तब पता चला कि ये एसएस इजिप्ट के बैंकनोट हैं। हैरानी की बात यह थी कि 10 साल तक समुद्र में रहने के बावजूद इन नोटों के रंग और डिजाइन सुरक्षित थे। हालांकि, इन नोटों पर आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं थे, इसलिए उनकी कोई कानूनी वैल्यू नहीं रह गई थी। बावजूद इसके, ये नोट इतिहास और संग्रहकर्ताओं के लिए बेहद कीमती बन गए। आज एसएस इजिप्ट की कहानी केवल एक समुद्री हादसा नहीं, बल्कि खजाने, त्रासदी और इतिहास के संगम का प्रतीक बन चुकी है। हैदराबाद के ये ‘डूबे हुए नोट’ भारतीय मुद्रा इतिहास की सबसे दिलचस्प और रहस्यमयी घटनाओं में गिने जाते हैं। आशीष/ईएमएस 10 अप्रैल 2026