ज़रा हटके
09-Apr-2026
...


ताइपे (ईएमएस)। एक ओर अमेरिका ईरान में युद्ध जारी है, और ट्रंप ने ईरान को बर्बाद करने में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। वहीं दूसरी ओर मौका पाकर चीन भी ताइवान को निगलने की तैयारी में जुट गया है। चीन के बढ़ते सैन्य दबाव और संभावित युद्ध के खतरे के बीच ताइवान के अंदर दिलचस्प लेकिन गंभीर ट्रेंड देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक एक ओर सरकार युद्ध की तैयारी में जुटी है, दूसरी तरफ आम लोग अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ‘प्लान बी’ बना रहे हैं, जिसमें विदेशों में पैसा, पासपोर्ट और ठिकाना शामिल है। ताइवान ने हाल के महीनों में अपने रक्षा खर्च को बढ़ाया है, अनिवार्य सैन्य सेवा की अवधि बढ़ाई है और बड़े स्तर पर युद्धाभ्यास शुरू किए हैं। यह सब चीन के बढ़ते आक्रामक रुख के कारण किया जा रहा है, जो ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग की धमकी देता रहा है। ताइपे में काम करने वाले 51 वर्षीय फाइनेंस प्रोफेशनल जैसे लोग अनिश्चित माहौल में अपनी अलग रणनीति बना रहे हैं। उन्होंने अपनी संपत्ति का एक हिस्सा सिंगापुर में ट्रांसफर किया, तुर्की की नागरिकता लेकर दूसरा पासपोर्ट हासिल किया है। उनका कहना है, ‘संभावना कम है, लेकिन अगर युद्ध हुआ तब नुकसान बहुत बड़ा होगा, इसलिए बैकअप प्लान जरूरी है। यह सोच अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में ताइवान के लोगों में विदेश जाने, दूसरा पासपोर्ट लेने और संपत्ति बाहर रखने की मांग तेजी से बढ़ी है। कई ताइवानी लोग हांगकांग के उदाहरण से भी प्रभावित हैं, जहां चीन के नियंत्रण बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में लोग देश छोड़कर चले गए। आज हांगकांग, कल ताइवान’ जैसे नारे अब फिर चर्चा में हैं। ताइवान की सरकार जहां रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रही है, वहीं आम नागरिकों के बीच दो तरह की मानसिकता दिख रही है। कुछ लोग युद्ध की स्थिति में देश के लिए लड़ने को तैयार हैं, जबकि कुछ लोग सुरक्षित निकलने का रास्ता खोज रहे हैं। एक सर्वे के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग स्पष्ट रूप से नहीं कह पा रहे कि वे लड़ने वाले हैं, या देश छोड़ देने वाले है। करीब 11 प्रतिशत लोगों ने साफ कहा कि वे भाग जाएंगे, जबकि 20 प्रतिशत ने कहा कि वे सेना के साथ खड़े होने वाले है। आशीष/ईएमएस 09 अप्रैल 2026