ज़रा हटके
11-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। थायरॉइड ग्रंथि में गड़बड़ी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक संतुलन पर भी गहरा असर डाल सकती है। यही वजह है कि कई लोग बिना किसी स्पष्ट कारण के उदासी, घबराहट या ध्यान की कमी महसूस करते हैं। मेडिकल रिसर्च बताती है कि गर्दन के सामने स्थित यह छोटी सी ग्रंथि शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह ऐसे हार्मोन बनाती है, जो मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, शरीर के तापमान और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित करते हैं। इसके साथ ही, ये हार्मोन दिमाग के केमिकल बैलेंस को भी प्रभावित करते हैं, जिससे सोचने-समझने की क्षमता और भावनात्मक स्थिरता बनी रहती है। जब थायरॉइड सही तरीके से काम नहीं करता, तो इसका सीधा असर मानसिक स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगता है। खासकर हाइपोथायरॉइडिज्म की स्थिति में शरीर में हार्मोन की कमी हो जाती है, जिससे व्यक्ति को लगातार थकान, सुस्ती, उदासी और डिप्रेशन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। ऐसे लोगों में काम करने की इच्छा कम हो जाती है, सोचने की गति धीमी पड़ जाती है और याददाश्त भी प्रभावित हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, थायरॉइड हार्मोन का सीधा संबंध दिमाग में मौजूद केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन से होता है। ये दोनों केमिकल्स हमारे मूड और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के मानसिक अस्थिरता और तनाव का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे हाशिमोटो और ग्रेव्स डिजीज प्रमुख हैं। इसके अलावा, शरीर में आयोडीन की कमी या अधिकता, लगातार तनाव, हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था या प्रसव के बाद होने वाले परिवर्तन भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले से थायरॉइड की समस्या रही हो, उनमें इसका खतरा और अधिक होता है। डॉक्टरों की सलाह है कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक थकान, उदासी, घबराहट या ध्यान में कमी जैसी समस्याएं महसूस हो रही हों, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय जांच कराना जरूरी है। सुदामा/ईएमएस 11 अप्रैल 2026