लंदन (ईएमएस)। वर्ष 2008 में साइबेरिया की एक गुफा से मिली छोटी सी उंगली की हड्डी ने मानव विकास से जुड़ी कई पुरानी धारणाओं को पलटकर रख दिया और वैज्ञानिकों को इंसानों की एक ऐसी प्रजाति के बारे में जानकारी दी, जिसके अस्तित्व से दुनिया अब तक अनजान थी। यह महत्वपूर्ण खोज दक्षिणी साइबेरिया के बर्फीले अल्ताई पर्वत क्षेत्र में स्थित डेनिसोवा गुफा में हुई थी। पुरातत्वविदों की एक टीम वहां खुदाई कर रही थी और गुफा की जमी हुई मिट्टी तथा जानवरों के अवशेषों को हटा रही थी। इसी दौरान उन्हें एक बेहद छोटा हड्डी का टुकड़ा मिला। बाद में पता चला कि यह हजारों साल पहले जीवित रही एक छोटी बच्ची की छोटी उंगली का हिस्सा था। देखने में यह हड्डी साधारण लग रही थी और इसमें ऐसी कोई विशेष बनावट नहीं थी जिससे उसकी पहचान तुरंत की जा सके। शुरुआत में वैज्ञानिकों को भी समझ नहीं आया कि यह अवशेष मानव विकास की किस शाखा से जुड़ा हुआ है। इसके बाद इस हड्डी को आनुवंशिक जांच के लिए विशेषज्ञों के पास भेजा गया। वैज्ञानिक यह जानना चाहते थे कि साइबेरिया की भीषण ठंड के बावजूद क्या इस अवशेष में डीएनए सुरक्षित बचा हुआ है। जब शोधकर्ताओं ने इसके माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए की जांच की तो परिणाम बेहद चौंकाने वाले निकले। यह डीएनए न तो आधुनिक इंसानों से मेल खाता था और न ही निएंडरथल प्रजाति से। इससे साफ हो गया कि यह इंसानों की एक बिल्कुल अलग और अज्ञात प्रजाति का हिस्सा है। वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति को “डेनिसोवन” नाम दिया, जिसका नाम उसी गुफा के आधार पर रखा गया जहां यह अवशेष मिला था। इस खोज ने मानव विकास की पूरी कहानी को नई दिशा दे दी। इससे पहले वैज्ञानिक मानते थे कि बर्फीले युग में केवल आधुनिक इंसान और निएंडरथल ही पृथ्वी पर मौजूद थे, लेकिन डेनिसोवन की खोज ने साबित कर दिया कि उस समय कई बुद्धिमान मानव प्रजातियां एक साथ पृथ्वी पर रह रही थीं। इतना ही नहीं, शोध में यह भी सामने आया कि डेनिसोवन और आधुनिक इंसानों के बीच संबंध बने थे। आज भी दक्षिण-पूर्वी एशिया और ओशिनिया के कई लोगों के डीएनए में डेनिसोवन प्रजाति के आनुवंशिक अंश मौजूद हैं। इस शोध ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि मानव इतिहास केवल संघर्ष और प्रतिस्पर्धा की कहानी नहीं है, बल्कि यह अलग-अलग मानव प्रजातियों के सह-अस्तित्व और आपसी मेलजोल की भी कहानी है। सुदामा/ईएमएस 31 मई 2026