नई दिल्ली (ईएमएस)। आयुष मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर लगातार योगासनों और उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी साझा कर रहा है। हाल ही में मंत्रालय ने अवसाद यानी डिप्रेशन से राहत दिलाने वाले योगासन और प्राणायाम के बारे में जानकारी दी है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, तनाव नियंत्रण और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी बेहद प्रभावी माना जाता है। आज की व्यस्त जीवनशैली, काम का बढ़ता दबाव, पारिवारिक तनाव और व्यक्तिगत समस्याओं के कारण डिप्रेशन तेजी से आम समस्या बनता जा रहा है। ऐसे में आयुष मंत्रालय ने लोगों से नियमित योगाभ्यास अपनाने की अपील की है। मंत्रालय का संदेश “योग युक्त, रोग मुक्त” है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिदिन 15 से 20 मिनट योग करने से मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार नियमित योगाभ्यास तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन को कम करने में मदद करता है और मन को स्थिर बनाता है। इससे चिंता, तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। डिप्रेशन से बचाव के लिए ध्यान, पवनमुक्तासन, ताड़ासन, भुजंगासन, भ्रामरी और अनुलोम-विलोम प्राणायाम को विशेष रूप से फायदेमंद बताया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक रोजाना 10 से 15 मिनट ध्यान करने से मानसिक उलझनें कम होती हैं और भीतर से शांति महसूस होती है। पवनमुक्तासन शरीर में जमी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक माना जाता है। वहीं भ्रामरी प्राणायाम मस्तिष्क को शांत करता है और तनाव कम करने में मदद करता है। ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारने के साथ आत्मविश्वास बढ़ाने में भी लाभकारी है। भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और छाती की जकड़न कम करने में मदद करता है, जिससे नकारात्मक भावनाओं में कमी आती है। वहीं अनुलोम-विलोम प्राणायाम मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को संतुलित कर मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है। सुदामा/ईएमएस 31 मई 2026