राष्ट्रीय
11-Apr-2026
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-निवेशकों का भरोसा कानूनी स्थिरता पर टिका नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल पूंजी और नीतियां पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि एक मजबूत, स्थिर और भरोसेमंद कानूनी व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होगी। यह बात भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को कही। वे बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘रूल ऑफ लॉ कन्वेंशन 2026’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना सिर्फ एक आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है, जिसे गंभीरता से लेना होगा। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि निवेशकों का भरोसा मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि किसी देश की कानूनी प्रणाली कितनी पारदर्शी, स्थिर और निष्पक्ष है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आर्थिक वादों और निवेश की नींव मजबूत कानून व्यवस्था पर ही टिकी होती है। उन्होंने बताया कि भारत को ऐसे निवेश की आवश्यकता है जो दीर्घकालिक और भरोसे पर आधारित हों। उदाहरण के तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में पेंशन फंड का निवेश, तकनीकी कंपनियों द्वारा ज्ञान साझा करना और वैश्विक कंपनियों द्वारा सप्लाई चेन विकसित करना, ये सभी लंबे समय की प्रतिबद्धताएं होती हैं। सीजेआई ने कहा कि निवेशक केवल अनुबंधों के पालन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे पूरे कारोबारी माहौल में निरंतर भरोसा और स्थिरता की अपेक्षा करते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछले दो दशकों में व्यापारिक विवादों का स्वरूप काफी बदल गया है। जहां पहले विवाद भुगतान या सप्लाई जैसे सरल मुद्दों पर होते थे, वहीं अब ये जटिल व्यावसायिक संबंधों और बड़े आर्थिक ढांचे से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि अब कानून की भूमिका केवल समझौते के समय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे व्यावसायिक संबंध के दौरान न्याय और संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। कानूनी सुधारों पर बात करते हुए सीजेआई ने तीन प्रमुख आवश्यकताओं का उल्लेख किया—कानून में स्थिरता, विवादों को पहले ही रोकने की संस्कृति, और विशेषज्ञता का विकास। उन्होंने ‘गुड फेथ’ यानी ईमानदारी से अनुबंध निभाने की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई और कहा कि मध्यस्थता को प्रोत्साहित कर विवादों को शुरुआती स्तर पर ही सुलझाया जा सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि आज के जटिल आर्थिक माहौल में इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्त और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े मामलों के लिए विशेष कानूनी ज्ञान जरूरी हो गया है। ऐसे में विशेषज्ञता आधारित न्याय प्रणाली भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हिदायत/ईएमएस 11अप्रैल26