ज़रा हटके
11-Apr-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। ईरान के साथ जारी संघर्ष ने अमेरिका के सामने एक ऐसी चुनौती खड़ी कर दी है जिसका समाधान मिसाइलों के पास नहीं है। खबर है कि ईरान के हमलों में अमेरिकी रडार सिस्टम और मिसाइल डिफेंस को भारी नुकसान पहुँचा है, लेकिन इन्हें ठीक करने के लिए अमेरिका के पास जरूरी गैलियम नहीं है। गैलियम एक ऐसा क्रिटिकल मिनरल है जिस पर चीन का लगभग एकाधिकार है। ऐसे में यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या अपनी सुरक्षा के लिए ट्रंप को शी जिनपिंग के सामने हाथ फैलाने पड़ेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, आधुनिक युद्ध अब हथियारों से ज्यादा आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) से लड़े जा रहे हैं। रडार और मिसाइल इंटरसेप्टर बनाने के लिए गैलियम अनिवार्य है, क्योंकि यह हाई-टेंपरेचर पर बेहतर काम करता है। चीन गैलियम की प्रोसेसिंग में दुनिया का बॉस है और उसने पहले ही इसकी सप्लाई को सीमित कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। अमेरिका के लिए मुसीबत यह है कि वह रातों-रात अपनी रिफाइनरी तैयार नहीं कर सकता और उसे चीन की ओर देखना ही होगा। विशेषज्ञ इसे मिनरल वॉर कह रहे हैं। चीन ने वर्षों से रेयर अर्थ और खनिजों की प्रोसेसिंग पर निवेश करके अमेरिका को रणनीतिक रूप से घेर लिया है। हालांकि अमेरिका अब ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ मिलकर वैकल्पिक रास्ते खोज रहा है, लेकिन इसमें सालों का वक्त लगेगा। फिलहाल, शॉर्ट टर्म में अमेरिकी सेना की रक्षा प्रणालियों को चालू रखने के लिए चीन की सप्लाई लाइन पर निर्भरता एक कड़वा सच है। क्या ट्रंप अपने अमेरिका फर्स्ट के नारे को बचा पाएंगे या जिनपिंग इस खनिज संकट को कूटनीतिक हथियार बनाकर अमेरिका को झुकने पर मजबूर कर देंगे? वीरेंद्र/ईएमएस 11 अप्रैल 2026