राष्ट्रीय
12-Apr-2026
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-ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक तेजी से बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व नई दिल्ली,(ईएमएस)। सोना हमेशा से आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता का प्रतीक माना जाता रहा है। परिवारों से लेकर देशों तक, सभी इसे संकट के समय सबसे सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं। 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के कई देश अपने सोने के भंडार (गोल्ड रिजर्व) को लगातार बढ़ा रहे हैं, ताकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और डॉलर पर निर्भरता से बचा जा सके। इस सूची में सबसे ऊपर संयुक्त राज्य अमेरिका है, जिसके पास करीब 8,133 टन सोना मौजूद है। यह दुनिया का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार माना जाता है, जिसका बड़ा हिस्सा सुरक्षित भंडारण केंद्र ‘फोर्ट नॉक्स’ में रखा गया है। दूसरे स्थान पर जर्मनी है, जिसके पास लगभग 3,350 टन सोना है। यह यूरोप का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार है। इसके बाद इटली (2,452 टन) और फ्रांस (2,437 टन) का स्थान आता है। पांचवें स्थान पर रूस है, जिसके पास लगभग 2,330 टन सोना है। हालांकि टॉप-5 में शामिल नहीं होने के बावजूद चीन तेजी से अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहा है। वर्तमान में चीन के पास करीब 2,313.5 टन सोना है और पिछले कई महीनों से वह लगातार खरीदारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो चीन जल्द ही टॉप-5 में शामिल हो सकता है। भारत भी सोना खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास लगभग 880 टन सोना है। भारत लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोने की खरीद बढ़ा रहा है। हाल के महीनों में भारत ने भी लगातार खरीदारी की है, ताकि डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो। दक्षिण एशिया में देखें तो पाकिस्तान के पास लगभग 64.77 टन सोना है, जो भारत की तुलना में काफी कम है। वहीं बांग्लादेश के पास लगभग 14.28 टन सोना मौजूद है। हाल के महीनों में कई देश सोना खरीदने की होड़ में दिख रहे हैं। विशेष रूप से पोलैंड ने फरवरी 2026 में अकेले लगभग 20 टन सोना खरीदा है। उसका लक्ष्य अपने विदेशी मुद्रा भंडार का 20 प्रतिशत हिस्सा सोने में बदलना है। इसके अलावा उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान भी लगातार अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं। दोनों देशों ने हाल ही में कई टन सोना खरीदकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। कुल मिलाकर, 2026 में वैश्विक स्तर पर सोने की मांग फिर से तेजी से बढ़ी है। केंद्रीय बैंक डॉलर के प्रभाव को कम करने और आर्थिक अस्थिरता से बचाव के लिए सोने को सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में गोल्ड रिजर्व की यह दौड़ और तेज होने की संभावना है। हिदायत/ईएमएस 12 अप्रैल 2026