पाकिस्तान की मध्यस्थता से शांति समझौता कराने की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान ने इस्लामाबाद में बातचीत की। अमेरिकी का प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने की , जबकि ईरानी वार्ताकारों की अगुवाई अगुआई ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कर रहे हैं। दल में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, भी हैं लेकिन यह वार्ता में सफलता मिलने की संभावना बहुत ही कम दिखाई दे रही है आज सारी दुनिया को मालूम है पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है आज कल सारे न्यूज़ चैनल में अमेरिका ईरान युद्ध के 11अप्रैल 26 के शान्ति वार्ता पर ध्यान केंद्रीत है जो पाकिस्तान फुले नहीं समा रहा है और ऐ दिखाने की कोशिश की गईं है कि पाकिस्तान शान्ति का मैसेंजर है लेकिन हकीकत उल्टी है दरअसल पाकिस्तान हाल ही में अफगानिस्तान में हवाई हमले कर 400 से अधिक निर्दोष नागरिकों को मौत की नींद सुला दिया और इजराइल पर ऐ आरोप लगाना तर्कसंगत है कि बेरूत में बम बरसा रहा है निर्दोष नागरिकों की हत्या कर रहा है जबकी वहाँ हिजबुल्लाह एक आतंकी संघठन है लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बुधवार को हुए इजरायली हमले में अब तक कम से कम 254 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 1100 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।जो मानता हूँ ठीक नहीं है लेकिन जब आंतकवादी को पनाह देने वाले और आतंकवादी गतिविधियों में हजारों की संख्या में खुद ही निर्दोष लोग जिसमें भारत भी है को धर्म के आधार पर मारते हैं तो क्या ऐ सही है यदि धर्म का आधार ही है तो अफगानिस्तान में क्यों निर्दोष लोगों को मारा गया ऐ सिर्फ और सिर्फ अपनी डफली अपना राग और अपने आतंकी छवि को एक सफेद झूठ की चादर से ढक रहें है पाकिस्तान और ईरान का सीमा विवाद क़ोई नया नहीं है 2 वर्ष पूर्व याद कीजियेगा 17 जनवरी 2024 को मंगलवार रात पाकिस्तान पर हुए ईरानी मिसाइल हमले में दो बच्चों की मौत और तीन अन्य के घायल होने के बाद पाकिस्तान और ईरान के राजनयिक संबंधों में दरार है। उस समय पाकिस्तान ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए तेहरान से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था और इस्लामाबाद में मौजूद ईरान के दूत के पाकिस्तान लौटने पर रोक लगा दी। उस समय इस्लामाबाद ने ईरान पर पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने का आरोपलगाया, जबकि ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि मिसाइलों ने जैश अल-अदल नामक सशस्त्र समूह के दो ठिकानों को निशाना बनाया था।उस समय एक बयान में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा गया था , यह गैर-कानूनी हरकत पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इसका कोई भी औचित्य नहीं है। इसमें चेतावनी दी गई, पाकिस्तान इस गैर-कानूनी हरकत का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। इसके परिणामों की पूरी ज़िम्मेदारी ईरान की होगी।अमेरिका भी कैसे पाकिस्तान के चंगुल में फंस गया ऐ भी उसकी वर्ड पावर की छवि को बहुत ही निचे बातचीत के टेबल तक ले गया ऐ उसके इतिहास में कभी नहीं हुआ की पाकिस्तान जैसे देश में जाकर शांति वार्ता के लिए मज़बूरी वश जाना पड़ा क्योंकि पहले जितने भी राष्ट्रपति हुए वो या तो वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर, हमले का बदला या ईरान पर हमला कर कभी पीछे नहीं मुड़ा जहाँ तक ईरान में युद्ध की बात है नाटो का कहना ऐ उसका निजी मामला है हमसे पूछ कर नहीं किया गया तो ईराक में जब सद्दाम हुसैन पर हमला किया गया तो किससे पूछ कर किया फिर भी वहाँ भी अमेरिका को क्या खतरा था ईरान से तो समझ में आता है कि अमेरिका को बाद में खतरा हो सकता था क्योंकि उसकी मिशायल की मारक क्षमता बाद में अमेरिका तक मार करने की क्षमता हासिल कर सकता था और जो अभी खाड़ी देशों में अमेरिका के बेस पर जिसतरह हमला हुआ वैसा पहले कभी नहीं हुआ ऐ अमेरिका को गहरा चोट पहुँचाया है और इसमें कहीं ना कहीं पाकिस्तान की भी मिली भगत हैं क्योंकि उसी के बॉडर से होकर ही हथियार गया है जो अमेरिका के लाख बम्रबारी के बाद भी 100 वीं लहर तक कैसे गया इसलिए की इसमें चीन और रूस के साथ पाकिस्तान का भी हाथ होगा हथियार पहुंचाने में, जो खबर निकल कर सामने आई है इसलिए पाकिस्तान शान्ति वार्ता क्या कराएगा जो खुद ही आतंकवादी के सहारे दहशतगर्द को पनपा रहा है और भारत में मासूमों की हत्या करवाता है 26/11/08 को मुंबई में पाकिस्तान के आईएसआई ने ऐसी कत्लेआम का अंजाम दिया जिसमें सैकड़ो मासूमों की जान चंद आतंकवादी ने कत्लेआम किया वो भी धर्म के नाम पर, और हाल ही में पहलगांव में दर्जनों भारतीय पर्यटक की हत्या धर्म के नाम पर की, अतः एक कहावत है जो संत कबीर ने लिखी है :-बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय,संत कबीरदास जी का यह प्रसिद्ध दोहा आत्म-निरीक्षण (self-reflection) का संदेश देता है, जो सिखाता है कि दूसरों में दोष ढूंढने से पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। भारत अगर ऑपरेशन सिंदूर कर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला नहीं करता तो कट्टरवादी आतंकी फिर क़ोई नया खेल करते और भारतीय मासूमों की जान जाती किसी भी धर्म में मानवता को ही सर्वोपरि माना गया है लेकिन धर्म की आड़ लेकर लोग इसका फायदा आतंक को पनपाने में करता है जो विश्व के लिए खतरा है अब ईरान भी उसी रास्ते पर चल पड़ा है क्योंकि जिस तरह खाड़ी देशों में उसके हमले में कई निर्दोष नागरिकों की मौत हुई है और जिस तरह हार्मोस को पूरी तरह बंद करके दूसरे देश के लिए क्यों बन्द किया जिसका इस युद्ध से क़ोई लेना देना नहीं है और उसने इसे सबसे बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। तेहरान ने छोटी नावों का इस्तेमाल करके हार्मोज में माइंस बिछा दी जिससे क़ोई भी जहाज इसका शिकार हो सकता है जिससे इस युद्ध में क़ोई लेना देना नहीं है कई जहाजो को वहाँ से गुजरने पर उड़ा भी दिया गया ऐ सब विश्व शांति के लिए खतरा है, और आतंकवादी देश आतंकी देश ही आपस में तालमेल बिठा लेते हैं और आतंकी को पनपाने में अमेरिका का ही हाथ रहा है क्योंकि यह बात खुद ट्रम्प ने ही पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को ईरान में परमाणु समझौता किया जिससे वो आज परमाणु बम बनाने के तरफ कदम रखा, हुती हिजबुल्ला, हमास, मलेशिया ग्रुप ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप हैं जो न सिर्फ इजराइल में बल्कि मिडिल ईस्ट में आतंकवादी गतिविधियों का अंजाम देते हैं ट्रम्प की हताशा यहाँ तक हो गईं थी की सभ्यता नष्ट की बात करते हैं और फिर शान्ति के मसीहा बन जाते हैं और ईरान में अपने पैर पसारने और सजाने संवारने की बात करते हैं वहीँ ईरान में कहाँ परिवर्तन हुआ आज भी खामनोई का फोटो और झंडा लहराते हुए लोग जश्न मानते नजर आ रहें हैं युद्ध विराम किया अच्छी बात है लेकिन पहले डराने धमकाने और ख़त्म करने का धमकी देने की जरुरत क्या थी ईरान ने अमेरिका को आर्थिक और सामरिक दृश्टिकोण से अपने मिशायल से काफी नुकसान पहुँचाया है और खाड़ी देश से अमेरिका के बेस को इस तरह बर्बाद किया है कि उन देशों पर अमेरिका का भरोसा उठ गया है और ऐ युद्ध इजराइल के लिए ख़त्म नहीं हुआ है आज भी बेरूत में हिजबुल्ला पर अटैक कर ही रहा है। इसलिए ऐ सीजफायर ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं है पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता मात्र एक दिखावा है क्योंकि ईरान का भरोसा खाड़ी में अपने परोसी देशों पर हमला करना और इजराइल ने साफ कहा है कि शांति वार्ता में ऐ युद्ध शामिल नहीं है और इजराइल का समर्थन ट्रम्प ने किया है तभी युद्ध हुआ और अब अमेरिका कुछ दिन युद्ध विराम कर इससे सबक लेते हुए आगे की सैन्य अभियान को द्रुस्त करने की है क्योंकि इसमें कई पेंच है जो इजराइल के पास येरुशेलम को लेकर एक धार्मिक स्थल है जो 2017 में डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बयान में साझा किया था कि यरूशलम न केवल तीन महान धर्मों का केंद्र है, बल्कि अब यह दुनिया के सबसे सफल लोकतंत्रों में से एक का भी केंद्र है। पिछले सात दशकों में, इज़राइल के लोगों ने एक ऐसा देश बनाया है जहाँ यहूदी, मुसलमान, ईसाई और सभी धर्मों के लोग अपनी अंतरात्मा और अपनी मान्यताओं के अनुसार रहने और पूजा-अर्चना करने के लिए स्वतंत्र हैं। यरूशलम आज भी एक ऐसा स्थान है—और हमेशा ऐसा ही रहना चाहिए—जहाँ यहूदी वेस्टर्न वॉल पर प्रार्थना करते हैं, जहाँ ईसाई स्टेशन्स ऑफ़ द क्रॉस पर चलते हैं, और जहाँ मुसलमान अल-अक्सा मस्जिद में इबादत करते हैं।जहाँ अमेरिका के रक्षा मंत्री हेगसेथ का कहना है कि यरूशलम का इतिहास क्रूसेड्स—मध्ययुग के उन क्रूर युद्धों—का बचाव करने का रहा है, जिनमें ईसाई और मुसलमान एक-दूसरे के खिलाफ लड़े थे। अपनी 2020 की किताब अमेरिकन क्रूसेड में, उन्होंने लिखा कि जो लोग पश्चिमी सभ्यता का आनंद लेते हैं, उन्हें किसी क्रूसेडर का शुक्रिया अदा करना चाहिए। उनके दो टैटू क्रूसेडर इमेजरी से सम्बंधित है : उनके अनुसार जेरूसलम क्रॉस और ड्यूस वुल्ट या भगवान की इच्छा वाक्यांश, है जिसे हेगसेथ ने जेरूसलम की ओर मार्च करते समय ईसाई शूरवीरों का रैली का नारा कहा है। अमेरिका में ईसाई धर्म के लोग 65 परसेंट है और यही चुनाव में जीत हार को तय करता है पिछले इतिहास को देखेंगे तो मालूम पड़ेगा ऐ असल में एक धर्म युद्ध है जिसमें कई सालों से युद्ध हुआ और खतनाक नतीजे सामने आए हैं। इसलिए भारत का इसमें क़ोई रोल है ही नहीं भारत में भगवान राम ने शान्ति का संदेश दिया और भारत में सनातन इसलिए गर्व से अपने भगवान राम के लिए मानवता का संदेश दुनिया को पहुंचाता रहा है इसलिए भारत विश्वगुरू है क्योंकि भारत में भगवान राम का आशीर्वाद है और जब भी क़ोई संकट आएगा तो संकटमोचन रामभक्त भगवान हनुमान उसे बचाने आएंगे।इसलिए मीडिया को ऐसी खबर दिखाने से बचना चाहिए जिसमें आतंकवादी को पालने वाला पाकिस्तान का गुणगान हो रहा हो और अपने देश की विदेश कूटनीति पर सवाल हो हमारा देश अंगजो के लाख कोशिश के बाद भी सबसे ज्यादा भगवान राम पर आस्था है यही प्रमाण है कि 1984 में जब रामानंद सागर की रामायण फ़िल्म आई तो बाहर सन्नाटा दिखाई देता और हर घर में रामायण का सीरियस हरेक घर में चलता था भगवान राम का मार्ग कठिनाई से भरा जरूर है लेकिन एक आदर्श इंसान बनने के लिए प्रेरणादायक है। इसलिए भारत को गर्व करना चाहिए कि भारत की धरती पर भगवान का जन्म राम के रुप में हुआ इसलिए यहाँ की मिट्टी में अपने प्रभु राम के चरणों से हरियाली है और उसी मिट्टी में पंचतत्व का शरीर राम नाम सत्य के नाम से ईश्वर को पाने की लालसा रखता है इसलिए हम किसी दूसरे के झगड़े में क्यों अपना समय बर्बाद करें होशियार आदमी को समझाया जा सकता है लेकिन मुर्ख को नहीं, हमारी सभ्यता और संस्कृति सबसे उत्कृष्ट है जिसे स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में सिद्ध किया अब खबर ऐ आई है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से शांति समझौता रहा बेनतीजा रहा क्या फिर युद्ध की आग में निर्दोष लोग मारे जायेंगे। ईएमएस / 12 अप्रैल 26