-भारत में अनाज का पर्याप्त भंडार, इसे ईरान भेजने पर किया जा रहा विचार नई दिल्ली,(ईएमएस)। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच एक महीन से ज्यादा चले युद्ध ने साबित कर दिया है कि तीनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन सबसे ज्यादा मार आम लोगों पर पड़ी है। सीजफायर का ऐलान जरूर हो गया है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी आसान नहीं हैं। युद्ध अपने साथ सिर्फ तबाही नहीं लाता, बल्कि महंगाई, बेरोजगारी और खाने-पीने की किल्लत भी लेकर आता है। ईरान में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां आम लोग महंगाई और जरूरी सामानों की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं भारत ने इंसानियत का परिचय देते हुए ईरानी लोगों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। शांति वार्ता भी बेअसर रही। भारत सरकार अब युद्ध से प्रभावित ईरान समेत कई देशों को चावल भेजने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि वहां के लोगों को राहत मिल सके। यह कदम सिर्फ एक कूटनीतिक पहल नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का बड़ा उदाहरण है। ईरान में जरूरी खाद्य सामग्री महंगी हो गई है और कई जगहों पर उपलब्धता कम हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे में भारत का आगे आना एक राहत भरी खबर है। सरकार के पास इस समय अनाज का पर्याप्त भंडार है, जिसे जरूरतमंद देशों तक पहुंचाया जा सकता है। यह फैसला भारत की वैश्विक भूमिका को भी मजबूत करता है, जहां वह सिर्फ एक आर्थिक ताकत ही नहीं, बल्कि संकट के समय मददगार देश के रूप में भी उभर रहा है। भारत सरकार के स्तर पर हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों के मुताबिक देश में गेहूं और चावल का बड़ा स्टॉक मौजूद है, जिसे अब निर्यात या मानवीय सहायता के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। खासतौर पर युद्ध से प्रभावित देशों को प्राथमिकता दी जा रही है। ईरान के लिए चावल की शिपमेंट शुरू करने का प्रस्ताव इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में नए सीजन की फसल आने वाली है, इससे गोदामों में जगह की कमी भी एक चुनौती है। दूसरी ओर वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित है। जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है और कई देशों में खाद्य संकट गहराने की आशंका है। इसको देखते हुए शिपिंग मंत्रालय को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस बात की योजना बनाएं कि कैसे बड़े कार्गो जहाजों के जरिए खाद्य सामग्री को प्रभावित देशों तक पहुंचाया जा सके। यहां तक कि कुछ हाई-वैल्यू फूड आइटम्स को हवाई मार्ग से भेजने पर भी विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान शांति वार्ता की मेजबानी में व्यस्त नजर आया और अंत में यह शांति वार्ता विफल भी हो गई। वहीं जमीनी स्तर पर राहत पहुंचाने में उसकी कोई खास भूमिका सामने नहीं आई है। इसके उलट भारत ने सीधे तौर पर मदद की पहल करके यह दिखा दिया है कि संकट के समय सिर्फ बातचीत ही नहीं, बल्कि ठोस कदम भी जरूरी होते हैं। यही वजह है कि भारत की इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है। इस कदम से भारत को दोहरा फायदा मिलेगा। एक तरफ गोदामों में जमा अतिरिक्त अनाज का इस्तेमाल हो जाएगा, जिससे भंडारण की समस्या कम होगी। सिराज/ईएमएस 12अप्रैल26