राष्ट्रीय
12-Apr-2026
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संजय राउत ने कसा तंज- पाक कंगाल है, लेकिन ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे उपक्रम उसने नहीं चलाए नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान-अमेरिका के बीच समझौते की अगुवाई पाकिस्तान द्वारा करने पर भारत में सियासत गरमा गई है। शिवसेना नेता संजय राउत ने पार्टी के अखबार सामना में केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक शेर पढ़ा- कोई टूटी सी कश्ती ही, बगावत पर उतर आए, तो कुछ दिन ये तूफां, सर उठाना भूल जाते हैं। संजय राउत ने लिखा, वसीम बरेलवी का यह शेर ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बाद इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पर साझा किया था, जो वर्तमान स्थिति में सटीक बैठता है। खुद को वैश्विक महाशक्ति समझने वाले अमेरिका को ईरान जैसे एक सामान्य देश ने सबक सिखा दिया है, यह पूरी दुनिया देख रही है। ईरान का संघर्ष वहां की राष्ट्राभिमानी जनता का विद्रोह था। जब ट्रंप ने एक ही रात में ईरान की सभ्यता और संस्कृति को नष्ट करने की धमकी दी थी, तब ईरान की लाखों जनता अपनी सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए मानव शृंखला बनाकर सड़कों पर उतर आई। ईरान की डेढ़ करोड़ जनता बलिदान देने के लिए तैयार है, ऐसा उनके विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा और ट्रंप को ‘शांति’ वार्ता के लिए मेज पर घसीट लाए लेकिन यह ‘मेज’ इस्लामाबाद में है, जो दुनिया में आतंकवादियों का प्रमुख केंद्र है। राउत ने आगे लिखा- अमेरिका पर इतिहास का सबसे भयानक आतंकवादी हमला करने वाला ‘लादेन’ पाकिस्तान के आश्रय में था और अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर लादेन को मारा था। भारत में आतंकवादी हमले करने वाले सभी मोहरे पाकिस्तान की शरण में हैं। वही पाकिस्तान अब ईरान-अमेरिका युद्ध में ‘शांतिदूत’ की भूमिका निभा रहा है। अमेरिका ने उसे शांतिदूत के रूप में मान्यता दे दी है। ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार की लालसा है लेकिन युद्धखोर ट्रंप को ऐसा शांति पुरस्कार देना, ये ‘शांति’ की अवधारणा का अपमान है। क्या पता? शायद पाकिस्तान के पीएम शाहबाज शरीफ और उनके सेना प्रमुख जनरल मुनीर को एक साथ नोबेल शांति पुरस्कार दे दिया जाए! ऐसी हलचलें शुरू हो गई हैं। संजय राउत ने लिखा- पाकिस्तान चीन जैसे देशों से कर्ज लेकर जीने वाला देश है। अमेरिका के पास मदद के लिए हमेशा खड़ा रहने वाला देश पाकिस्तान है। फिर यही पैसा सेना और आतंकवाद को पालने में खर्च किया जाता है। अब क्या कहा जाए? पाकिस्तान कंगाल है, लेकिन ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे उपक्रम उन्होंने नहीं चलाए। फिर भी वैश्विक युद्ध रोकने का श्रेय अमेरिका ने पाकिस्तान को दे दिया। पाकिस्तान की विदेश नीति भारत से भी सरस साबित हुई। हम पाकिस्तान से हजार गुना आगे हैं लेकिन इन वैश्विक घटनाओं में भारत ने कोई भूमिका नहीं निभाई। हमारे प्रधानमंत्री करते क्या हैं? क्या इस देश में सच में कोई प्रधानमंत्री है? देश का नेतृत्व करने के लिए लोगों ने लगातार चुनाव प्रचार में व्यस्त रहने वाला एक संघ प्रचारक चुना है। सजंय राउत ने लिखा, पीएम मोदी ने पिछले 11 सालों में केवल गले मिलने और वैश्विक नेताओं के गले पड़ने का ही काम किया है। इससे हासिल कुछ नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने अब तक दो वैश्विक कार्यक्रम किए। अपने पहले शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ को विशेष रूप से आमंत्रित किया और उसका खूब ढिंढोरा पीटा था। नवाज शरीफ की बेटी की शादी और शरीफ के जन्मदिन के अवसर पर पीएम मोदी विशेष रूप से केक खाने इस्लामाबाद गए। उस ‘मास्टरस्ट्रोक’ का तो शंखनाद ही किया गया। इन कारनामों को छोड़ दें तो पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर कोई भी चमक नहीं दिखाई है। विदेश दौरों को भारतीय मीडिया में उनका बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना, इसके अलावा मोदी ने कुछ अलग किया हो, ऐसा दिखाई नहीं देता। शिवसेना नेता ने लिखा- ईरान-इजराइल, अमेरिका के झगड़े में भारत क्यों पड़े? उनका वो देख लेंगे, ऐसा तर्क जब पीएम मोदी के समर्थक देते हैं तब भारत के वैश्विक अस्तित्व को लेकर चिंता होने लगती है। अगर ऐसा ही है तो ‘विश्वगुरु’ जैसी स्वघोषित उपाधि की होली जला देनी चाहिए। ठीक है, फिर अमेरिका के चुनावी प्रचार का बिगुल भारत में फूंककर ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसा प्रचार कार्यक्रम आयोजित करने का काम इन्होंने क्यों किया? भारत के पास वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और युद्ध के समय ‘शांतिदूत’ के रूप में काम करने का लंबा अनुभव है। विदेश नीति के मौजूदा अधकचरों को अगर आजादी के बाद का इतिहास खंगालने की फुर्सत मिले तो उन्हें ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे। भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद विश्वशांति के लिए बड़े काम किए हैं। कई देशों में युद्धविराम और शांति स्थापना में भारत ने निर्णायक भूमिका निभाई है। संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के जरिए भी भारत ने महान कार्य किए हैं। ईरान-इजराइल, अमेरिका के बीच युद्धविराम में पाकिस्तान को ‘शांतिदूत’ का सम्मान मिलने से मोदी की विफलता उजागर हो गई। ईरान ने अमेरिका को झुका दिया। एक छोटी सी नाव ने तूफान से मुकाबला किया लेकिन पीएम मोदी का जहाज उस तूफान में भटक गया और गायब हो गया। सिराज/ईएमएस 12अप्रैल26