-रिपोर्टों में तीन नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाया गया नई दिल्ली,(ईएमएस)। अल्पसंख्यक नेतृत्व के एकीकरण को लेकर कांग्रेस में तनाव बढ़ गया है। कहा जा रहा है कि पार्टी हाईकमान सीएम सिद्धारमैया के करीबी नेताओं की पार्टी विरोधी गतिविधियों से नाराज हैं। ऐसे में इन नेताओं पर पार्टी आलाकमान जल्द एक्शन ले सकता है। हाल ही में अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया था। अब सीएम के राजनीतिक सचिव नजीर अहमद को पद छोड़ने के लिए कहा गया है। शनिवार को सिद्धामैया और हाईकमान के बीच देर रात तक कई दौर की बातचीत हुई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हाईकमान ने निर्देश दिया है कि दावणगेरे दक्षिण में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी और पूर्व जद(एस) नेता जमीर अहमद खान भी इस जांच के घेरे में आ गए हैं। इंटेलिजेंस विंग और एआईसीसी सचिव अभिषेक दत्त की दो अलग-अलग रिपोर्टों में जब्बार, नजीर अहमद और जमीर को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाया गया। उनपर आरोप हैं कि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों का समर्थन किया। इसके साथ ही उनके कंपेन के लिए फंडिंग की और चुनाव में भी मदद की। पार्टी को शक है कि इनमें से कुछ नेताओं ने वित्तीय रूप से एसडीपीआई की मदद की होगी, जो कांग्रेस के लिए किसी बड़ी राजनीतिक चुनौती से कम नहीं है। इंटेलिजेंस इनपुट्स ने दावणगेरे दक्षिण में एक एसडीपीआई उम्मीदवार के समर्थन से जुड़े वित्तीय लेनदेन को ट्रैक किया है। तीनों नेताओं ने एक अल्पसंख्यक उम्मीदवार, सादिक पहलवान के लिए भी पुरजोर दबाव बनाया था। इसके बाद सिद्धारमैया को आंतरिक असंतोष को शांत करने के लिए सेकेंड लाइन मुस्लिम नेताओं रिजवान अरशद और सलीम अहमद को आगे लाना पड़ा। जब्बार और नजीर अहमद के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद, सीएम अब जमीर अहमद को कैबिनेट से हटाने पर विचार कर रहे हैं। सिराज/ईएमएस 12अप्रैल26