गुना (ईएमएस)। जिले के कडिय़ा गांव में खुशियों का माहौल उस वक्त चीख-पुकार में बदल गया, जब एक शादी समारोह के दौरान हुई आतिशबाजी ने भीषण अग्निकांड का रूप ले लिया। दोपहर करीब 2 बजे हुई इस घटना में एक ग्रामीण का कच्चा मकान, मवेशियों की झोपड़ी और घर के भीतर खड़ा ट्रैक्टर जलकर राख हो गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सूचना के डेढ़ घंटे बाद पहुंची दमकल में पानी तक नहीं था, जिससे आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आतिशबाजी की चिंगारी बनी काल जानकारी के अनुसार, गांव में भागवत कथा का आयोजन चल रहा था, जिसमें कृष्ण-रुक्मणि विवाह के प्रसंग के साथ ही धीरज सिंह और रमेश लोधी के बेटों के विवाह संपन्न होने थे। कथा स्थल के पास पैरायनी (विवाह रस्म) का कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान उत्साह में की गई आतिशबाजी की कुछ चिंगारियां उड़कर पास ही स्थित मांगीलाल पुत्र प्रभुलाल के कच्चे मकान और मवेशियों के छप्पर पर जा गिरीं। घास-फूस और सूखी लकड़ियों के कारण आग ने देखते ही देखते पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। मवेशियों को बचाने के लिए जान पर खेले युवा जिस वक्त यह हादसा हुआ, गांव के अधिकांश लोग विवाह स्थल पर मौजूद थे। घर से आग की लपटें उठती देख ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई। गांव के युवाओं ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए जलती हुई झोपड़ी के भीतर प्रवेश किया और वहां बंधे मवेशियों को समय रहते खोलकर बाहर निकाला, जिससे उनकी जान बच गई। हालांकि, मकान के भीतर रखा कीमती सामान और बाहर खड़ी ट्रैक्टर-ट्राली को नहीं बचाया जा सका। व्यवस्थाओं की खुली पोल: बिना पानी पहुंची फायर ब्रिगेड ग्रामीणों ने बताया कि घटना के तुरंत बाद पुलिस और बीनागंज नगर परिषद को सूचना दी गई थी। बिजली कटौती के कारण ट्यूबवेल बंद थे, जिससे लोग हैंडपंप और बर्तनों से पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश करते रहे। विडंबना यह रही कि दमकल करीब डेढ़ घंटे की देरी से दोपहर साढ़े 3 बजे मौके पर पहुंची। ग्रामीणों का आक्रोश तब और बढ़ गया जब पता चला कि दमकल में पानी ही नहीं था। दमकलकर्मियों ने बाद में पानी भरकर आग बुझाई, लेकिन तब तक मांगीलाल की पूरी गृहस्थी जलकर खाक हो चुकी थी। ट्रैक्टर पूरी तरह जल गया और ट्राली के टायर भी राख हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय पर मुस्तैदी दिखाता, तो इस बड़े नुकसान को काफी हद तक टाला जा सकता था। - सीताराम नाटानी