राज्य
13-Apr-2026
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:: शंखध्वनि और हनुमान चालीसा के पाठ के बीच इंदौर के खेड़ापति आश्रम में साकार हुआ अलौकिक दृश्य :: इंदौर (ईएमएस)। इंदौर के आध्यात्मिक क्षितिज पर सोमवार को एक ऐसी घटना अंकित हुई, जिसने आधुनिक विज्ञान और प्राचीन योग परंपरा के संगम को प्रत्यक्ष कर दिया। तिल्लौर-शिवनगर मार्ग स्थित खेड़ापति आश्रम (पिपलिया लोहार) में 72 घंटे की कठिन भू-समाधि के उपरांत महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 राजगुरु महाराज जब 8 फीट गहरी भूमि से बाहर आए, तो वहां मौजूद लाखों श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। पूरा परिसर जय श्री राम के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। राजगुरु महाराज शुक्रवार को साधना के लिए भूमिगत हुए थे। सोमवार दोपहर ठीक 12:40 बजे जब 11 वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार और गंगाजल छिड़काव के साथ समाधि स्थल को खोला, तो महाराजश्री उसी अविचल मुद्रा में विराजमान थे। बिना किसी मानवीय सहयोग के वे स्वयं समाधि से बाहर आए। कौतूहल तब और बढ़ गया जब चिकित्सकीय परीक्षण में उन्हें पूर्णतः स्वस्थ और ऊर्जावान पाया गया। चिकित्सकों के अनुसार, इतनी लंबी अवधि तक भू-समाधि में रहने के बावजूद उनके शरीर के मानक सामान्य थे, जो योगिक श्वसन क्रिया की सफलता को दर्शाता है। दोपहर 12 बजे से ही आश्रम में प्रतीक्षा का उद्वेग चरम पर था। हजारों की संख्या में उपस्थित जनसमूह एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा था। विधायक सुश्री उषा ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की साधना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की अटूट शक्ति का प्रकटीकरण है। उन्होंने हर घर में हनुमान चालीसा के संस्कार रोपने का आह्वान किया। आश्रम के विक्रम सिंह सोलंकी और समन्वयक बीडी तिवारी ने बताया कि इस आध्यात्मिक उपलब्धि को सामाजिक सरोकार से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को सर्व समाज का निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित होगा। विराट हनुमंत मेला का समापन बुधवार, 15 अप्रैल को होगा। समाधि स्थल से बाहर आते ही राजगुरु महाराज के मुख मंडल पर थकान के स्थान पर एक अपूर्व शांति और तेज व्याप्त था। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को आशीर्वाद देते हुए कहा कि संयम और संकल्प से ही आत्मिक विजय संभव है। प्रकाश/13 अप्रैल 2026