ईरान संग खुलकर आया चीन, ट्रंप को दी वॉर्निंग-हमारे मामले में दखल न दें.. होर्मुज के चक्रव्यूह में अमेरिका के सामने चीन -अमेरिका को ईरानी पोर्ट पर हमला न करने की चेतावनी, ईरान बोला- हमारे पोर्ट को निशाना बनाया तो इलाके का कोई बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है। पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता फेल होने के बाद दोनों ही एक-दूसरे पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां होर्मुज पर नाकाबंदी का ऐलान किया है, तो वहीं ईरान ने पलटवार करते हुए तेल को लेकर वार्निंग दे डाली है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया, तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर में कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गाड्र्स ने कहा कि क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। अगर सुरक्षा सबके लिए नहीं होगी, तो किसी के लिए भी नहीं होगी। इस बीच ट्रंप की ओर से चीन को दी गई टैरिफ धमकी पर अब ड्रैगन ने भी अटैक किया है और ईरान के साथ खुलकर खड़ा हो गया है। चीन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि, हमारे मामले में दखल न दें। यानी अब होर्मुज के चक्रव्यूह में अमेरिका के सामने चीन खड़ा हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर धड़ाधड़ एक्शन लेते नजर आ रहे हैं और उनके ज्यादातर फैसलों से न सिर्फ ईरान, बल्कि चीन भी प्रभावित हो रहा है। चीन द्वारा ईरान को सैन्य हथियारों की मदद करने से जुड़े इंटेल के बाद बीते दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया था और कहा था कि चीन द्वारा ईरान की सैन्य मदद करने से जुड़े सवाल पर ट्रंप ने कहा था कि, इसके परिणाम गंभीर होंगे। मुझे शक है कि वे ऐसा करेंगे, अगर हमने उन्हें ऐसा करते हुए पकड़ लिया, तो उन पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा, जो कि सचमुच एक बहुत बड़ी रकम है। हमारे जहाज रोका तो होंगे गंभीर परिणाम अब चीन ट्रंप की धमकियों के बीच खुलकर ईरान के साथ खड़ा नजर आ रहा है। ट्रंप की होर्मुज पर नाकाबंदी की घोषणा के बाद ड्रैगन ने ईरान का समर्थन किया है और अमेरिका को बड़ी चेतावनी भी दी है। ट्रंप के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून ने कहा कि, बीजिंग दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और मध्य पूर्व की स्थिति पर नजर रख रहा है। उन्होंने आगे सख्त लहजे में कहा कि, हमारे जहाज होर्मुज स्ट्रेट में लगातार आ-जा रहे हैं। ईरान के साथ हमारे व्यापारिक और ऊर्जा समझौते हैं। हम उनका सम्मान करेंगे और उम्मीद करते हैं कि कोई और हमारे मामलों में दखल न दे। होर्मुज पर ईरान का कंट्रोल है और यह हमारे लिए खुला है। ट्रंप के निशाने पर है चीन अमेरिका की ईरान से जंग हो या फिर वेनेजुएला में स्ट्राइक, कहीं न कही निशाने पर चीन रहा है। यही वजह है कि चीन अब खुलकर ईरान के समर्थन में खड़ा हो गया है और ऐसा हो भी क्यों न आखिर उसकी एनर्जी सुरक्षा जो खतरे में है। पहले वेनेजुएला के तेल पर कंट्रोल करके ट्रंप ने चीन पर चोट की थी, क्योंकि वहां के तेल का चीन प्रमुख खरीदार था। तो वहीं ईरानी तेल का भी सबसे बड़ा ग्राहक चीन ही है, तो ट्रंप ने ईरान पर अटैक कर एक तीर से दो निशाने साधे हैं। दक्षिण लेबनान में इजराइली सेना का ग्राउंड ऑपरेशन शुरू इजराइल की सेना ने सोमवार को कहा कि उसने दक्षिण लेबनान के बिन्त जबील इलाके में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू कर दिया है। सेना के मुताबिक, यह खास टारगेट्स को निशाना बनाकर हमला किया जा रहा है। वहीं, ईरान और पाकिस्तान का कहना है कि पिछले हफ्ते जो अस्थायी सीजफायर हुआ था, उसमें लेबनान भी शामिल है। लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि लेबनान में कोई सीजफायर नहीं है और इजराइल हिजबुल्लाह पर पूरी ताकत से हमला जारी रखेगा। ईरान के प्रमुख बंदरगाह अमेरिकी नाकेबंदी की जद में अमेरिका की नाकेबंदी के तहत ईरान के सभी प्रमुख बंदरगाह निशाने पर होंगे। इसमें फारस की खाड़ी के साथ ओमान सागर में स्थित बंदरगाह भी शामिल हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, नाकेबंदी ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी। ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह बंदर अब्बास है, जो खाड़ी के मुहाने पर स्थित है और हर साल करीब 3.7 करोड़ टन माल व लगभग 10 लाख कंटेनर हैंडल करता है। इस बंदरगाह से पेट्रोलियम उत्पाद, स्टील, क्रोम, खाद, अनाज और निर्माण उपकरण का बड़ा व्यापार होता है। इसके अलावा बंदर इमाम खुमैनी ईरान का आधुनिक बंदरगाह है, जो हर साल 1.6 करोड़ टन से ज्यादा कार्गो संभालता है और पेट्रोकेमिकल निर्यात का प्रमुख केंद्र है। जापान ने होर्मुज में माइंसवीपर भेजने पर फैसला टाला जापान ने होर्मुज स्ट्रेट में माइंसवीपर भेजने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। सरकार ने कहा है कि सेल्फ-डिफेंस फोर्स की तैनाती पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालात पर नजर बनाए हुए है और आगे का फैसला स्थिति के अनुसार लिया जाएगा। जापान का कहना है कि फिलहाल सबसे जरूरी है क्षेत्र में तनाव कम करना और समुद्री रास्तों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और व्यापक समझौते की दिशा में प्रगति पर भी जोर दिया गया है। माइंसवीपर ऐसे खास नौसैनिक जहाज होते हैं, जो समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाकर जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित बनाते हैं। ये जहाज तकनीक की मदद से पानी के अंदर छिपी माइंस का पता लगाते हैं और उन्हें निष्क्रिय या नष्ट कर देते हैं। विनोद उपाध्याय / 13 अप्रैल, 2026