रायसेन। जिले की सिलवानी तहसील से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। स्थिति यह है कि तहसील के कई गांवों में बिना अनुमति और नियमों को ताक पर रखकर ईंट भट्ठों का संचालन खुलेआम किया जा रहा है। इस पूरे मामले में तहसीलदार सुधीर शुक्ला पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सिलवानी तहसील इन दिनों अवैध ईंट भट्ठों का गढ़ बन चुकी है। जैथारी सर्किल, पौड़ी, चैनपुर, समनापुर, मरेहठी, अमगवा, प्रतापगढ़, नगपुरा, सनाईडार, खमरियाखुर्द, हमीरपुर, नादपुर, भानपुर, रैपुरा, निभोरा, सेमराखास, जौहर, देवरी, हतनापुर और महका सहित तीन दर्जन से अधिक स्थानों पर ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश भट्ठे बिना किसी वैध अनुमति के चलाए जा रहे हैं। जहरीला धुआं बना जानलेवा.... ग्रामीणों का कहना है कि इन अवैध ईंट भट्ठों से निकलने वाला जहरीला धुआं उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। गांवों में बच्चों और बुजुर्गों में सांस, खांसी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय धुएं की मात्रा और भी अधिक हो जाती है, जिससे घरों में रहना तक मुश्किल हो जाता है। एक ग्रामीण ने बताया, “हमने कई बार स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। धुएं के कारण बच्चों की तबीयत लगातार खराब हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।” तहसीलदार पर संरक्षण के आरोप... मामले की सबसे गंभीर बात यह है कि ग्रामीणों ने सीधे तौर पर तहसीलदार सुधीर शुक्ला पर संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासन की जानकारी के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध ईंट भट्ठों का संचालन संभव नहीं है। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के चलते यह कारोबार बेखौफ जारी है।हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से लंबे समय से कार्रवाई नहीं हो रही, उससे संदेह और गहरा गया है। नियमों की खुली अनदेखी.... नियमों के मुताबिक, ईंट भट्ठा संचालित करने के लिए पर्यावरण विभाग, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना भी जरूरी है। लेकिन सिलवानी तहसील क्षेत्र में इन नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, बिना अनुमति और पर्यावरण मानकों के खिलाफ चल रहे भट्ठे न केवल हवा को प्रदूषित करते हैं, बल्कि आसपास की जमीन और जल स्रोतों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं... ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को लिखित एवं मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कुछ ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। एक बड़ा सवाल... सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन इन अवैध ईंट भट्ठों पर कब कार्रवाई करेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा? बहरहाल अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले को कितनी प्राथमिकता दी जाती है और कब तक अवैध ईंट भट्ठों के इस नेटवर्क पर लगाम लग पाती है। फिलहाल, सिलवानी के ग्रामीण जहरीले धुएं के बीच जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। किशोर वर्मा ईएमएस रायसेन 13/04/2026