राष्ट्रीय
14-Apr-2026


नोएडा (ईएमएस)। नोएडा में श्रमिकों के द्वारा हिंसा हुई नहीं थी, बल्कि सोची-समझी रणनीति के तहत कराई गई थी...? नोएडा में सोमवार को हजारों श्रमिक सड़कों पर उतार आए और उन्‍हीं फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ करने लगे, जिसमें वे काम करते हैं। ये वहीं, फैक्ट्रियां हैं, जिनसे उनका घर चलता है, उनकी रोजी-रोटी का इंतजाम होता है। लेकिन कैसे हजारों मजदूर तोड़फोड़ करने का उतर आए। इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच में धीरे-धीरे सामने आ रहा हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि हिंसक प्रदर्शन में शामिल कई लोग मजदूर थे ही नहीं। पुलिस जांच में पता चला है कि नोएडा में प्रदर्शनकारियों को जुटाने और विरोध को हिंसक बनाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुपों का बड़ी संख्‍या में इस्तेमाल हुआ। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को क्यूआर कोड के जरिए अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुपों में जोड़ा गया। यह प्रक्रिया बेहद तेजी से की गई, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को रातोंरात इन ग्रुपों में शामिल किया गया। इन ग्रुपों के नाम भी अलग-अलग थे, जिससे उनकी पहचान करना शुरुआती दौर में मुश्किल हो गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक ग्रुप मजदूर आंदोलन के नाम से संचालित हो रहा था, जिसमें विभिन्न मजदूर संगठनों और समूहों को जोड़ा गया था। इन समूहों में लगातार संदेश भेजे जा रहे थे, जिसमें लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि इन व्हाट्सएप ग्रुपों में कई भड़काऊ और उत्तेजक पोस्ट शेयर किए। इन संदेश का मकसद भीड़ को उकसाना और विरोध को अधिक आक्रामक बनाना था। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान ये अहम सबूत मिले हैं। डिजिटल फॉरेंसिक जांच में इन ग्रुपों की गतिविधियों, संदेशों और एडमिन की भूमिका भी जांच हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित रणनीति के तहत किया गया प्रयास दिखाई देता है। वहीं, पुलिस अब इन ग्रुपों के एडमिन और ऑपरेटर्स की पहचान कर रही है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन गतिविधियों के पीछे कौन लोग या संगठन सक्रिय थे। आशीष दुबे / 14 अप्रैल 2026