- अंबेडकर जयंती पर सेंट्रल जेल से रिहा हुए 6 बंदी; अब साल में 5 बार मिलेगी माफी की सौगात इंदौर (ईएमएस)। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती रविवार को इंदौर सेंट्रल जेल के छह बंदियों के लिए नई जिंदगी की शुरुआत लेकर आई। हत्या जैसे गंभीर मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे इन बंदियों को उनके अच्छे आचरण के पुरस्कार स्वरूप समय से पूर्व रिहा किया गया। जेल प्रशासन ने उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने की सीख के साथ विदा किया। रिहा किए गए इन बंदियों ने जेल की सलाखों के पीछे अपनी सजा का एक बड़ा हिस्सा (करीब 14 वर्ष) पूरा कर लिया था। सामान्यतः आजीवन कारावास में 20 वर्ष की सजा का प्रावधान होता है, लेकिन इनके सकारात्मक व्यवहार को देखते हुए शासन ने शेष 6 साल की सजा माफ कर दी। रिहा होने वालों में भारत पिता जगन्नाथ, राधेश्याम पिता श्रीपत, इमरान पिता आशिक, फूलचंद पिता मांगीलाल भील, सुंदरलाल पिता राम सिंह और नरसिंह पिता किशन शामिल हैं। जेल परिसर में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम के दौरान जेल अधीक्षक डॉ. अलका सोनकर ने सभी रिहा हुए बंदियों को श्रीफल, पुष्पहार और उनके द्वारा जेल में किए गए कार्य की पारिश्रमिक राशि भेंट की। इस दौरान उन्होंने बंदियों को नया जीवन शुरू करने और अपराध की दुनिया से दूर रहकर बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा दी। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार ने कैदियों की रिहाई के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। पहले केवल स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर ही बंदियों को रिहा किया जाता था। अब इस दायरे को बढ़ाते हुए गांधी जयंती, अंबेडकर जयंती और आदिवासी जनजाति दिवस को भी इसमें शामिल किया गया है। इस नई नीति से उन बंदियों को लाभ मिल रहा है जो सुधार की दिशा में अग्रसर हैं। - प्रकाश/14 अप्रैल 2026