- रूस बना शीर्ष आपूर्तिकर्ता, ईरान ने 7 साल बाद वापसी करते हुए अमेरिका को पछाड़ा नई दिल्ली (ईएमएस)। ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध तथा मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दिख रहा है। अप्रैल के पहले दो हफ्तों में भारत का कच्चे तेल का आयात फरवरी के मुकाबले 21 फीसदी कम हो गया है। इस अवधि में रूस एक बार फिर भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा, जबकि ईरान ने 7 साल बाद वापसी करते हुए अमेरिका को पीछे छोड़ दिया। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में जारी रुकावटों के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा व्यापार में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। केपलर के शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 1-14 अप्रैल के दौरान भारत का कच्चा तेल आयात घटकर 41 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो फरवरी में 52 लाख बैरल प्रतिदिन था, यह 21 फीसदी की बड़ी गिरावट है। मार्च के 44 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले भी इसमें 8 फीसदी की कमी आई है। इस अवधि में भारत के कुल 5.75 करोड़ बैरल आयात में से रूस ने 2.31 करोड़ बैरल (करीब 40 फीसदी) की आपूर्ति की, जिससे वह शीर्ष आपूर्तिकर्ता बना रहा। वहीं, ईरान ने करीब 40 लाख बैरल (लगभग 7 फीसदी) तेल की सप्लाई कर भारत के चौथे सबसे बड़े सप्लायर के रूप में 7 साल बाद वापसी की है, उसने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। भारतीय रिफाइनरियों ने अमेरिका द्वारा रूस और ईरान के तेल पर दी गई छूट का फायदा उठाया। इस बीच, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में तनाव गहरा गया है। अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी और ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी के कारण इस जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है, जिससे आपूर्ति पर सीधा असर पड़ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर मई तक स्थिति नहीं सुधरी, तो न केवल ऊर्जा बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर भी गहरा संकट आ सकता है। तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। जून डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड लगभग 5 फीसदी बढ़कर 99.39 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि मई के लिए डब्ल्यूटीआई क्रूड 4 फीसदी चढ़कर 94.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अपने इनरिच्ड यूरेनियम को लेकर एक समझौते के लिए तैयार हो सकता है, जिससे युद्ध समाप्त होने की उम्मीदें बढ़ी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डील होने पर ईरान अमेरिका को फ्री ऑयल की आपूर्ति कर सकता है। हालांकि, ईरान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल की शुरुआत में हुआ दो सप्ताह का युद्धविराम 21 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, जिसका उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज को जहाजों के लिए खोलना था। लेकिन ईरान इस समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार है और तेल आपूर्ति बाधित हो रही है। सतीश मोरे/17अप्रैल ---