रांची(ईएमएस)।महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन लागू करने की भाजपा की साजिश और चोरी पकड़ी गयी है। एक कहावत है कि चोर कितना भी शातिर हो, मगर वह कुछ न कुछ ऐसी गलती या क्लू छोड़ ही देता है, जिससे वह फंस जाता है।आज भाजपा की स्थिति वही हो गयी है।सोचने और समझने वाली बात है कि आप परिसीमन के साथ विधानसभा की सीटें बढ़ायेंगे, मगर राज्यसभा की नहीं। आखिर यह किस तरह की साजिश है।सरकार की मंशा है कि वह महिला आरक्षण बिल के जरिये महिलाओं को आगे रखकर परिसीमन को लागू करना चाहती है।यही देश को मंजूर नहीं है. बगैर जनगणना, वह भी ओबीसी का कोटा तय हुए और सरना धर्म कोड लागू किए बिना परिसीमन मंजूर नहीं है।यह बातें शुक्रवार को झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कही।उन्होंने कहा कि देश के सभी राजनीतिक दल चाहते हैं कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिले। मगर केंद्र सरकार और भाजपा यह बताये कि जब पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार ने दिसंबर 2023 में संविधान संशोधन कर महिला आरक्षण बिल पारित किया और उसका गजट प्रकाशन भी हुआ, तो उसे इतने समय तक लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अब जब मोदी सरकार बैशाखी पर चल रही है, ऐसे में फिर से संविधान संशोधन के जरिए महिला आरक्षण बिल लाने की जरूरत क्यों पड़ी।दरअसल इसके आड़ में बिना जनगणना के परिसीमन लागू करने की कोशिश की जा रही है।यह सबसे बड़ी साजिश है, जिसे विपक्ष मंजूर नहीं करेगा।अगर सरकार ईमानदार है तो वह दिसंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को ही लागू करे। यह पूरे देश को मंजूर है।सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सदन में रक्षामंत्री द्वारा दिया गया बयान हास्यास्पद है। उन्होंने कहा कि यह कहा गया कि मोदी जी को देश की 140 करोड़ जनता ने चुना है।शायद उनकी मेमोरी कमजोर हो गयी है।चुनाव आयोग का डाटा देख लें, 2024 के चुनाव में देश के मात्र 38 प्रतिशत लोगों ने भाजपा को वोट दिया। यानी देश की 62 प्रतिशत जनता ने भाजपा को नकार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के चुनाव में छठे राउंड तक पिछड़ने के बाद ईवीएम की कृपा से किसी तरह भाजपा चुनाव जीतने में सफल हुई। कर्मवीर सिंह/17अप्रैल/26