वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट रिपोर्ट ने चिंता बढ़ाई जबलपुर, (ईएमएस)। अगले 50 वर्षों में नर्मदा का अस्तित्व खतरे में पड़ने की आशंका जताने वाली अमेरिका के वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट रिपोर्ट ने संस्कारधानी की चिंता बढ़ा दी है। नर्मदा नदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि जबलपुर की जीवनरेखा है। शहर की पेयजल आपूर्ति, पर्यटन, धार्मिक आस्था और हजारों परिवारों की आजीविका इसी पर टिकी है। शहर की बड़ी आबादी को पेयजल नर्मदा से ही मिलता है। गर्मियों में जलस्तर घटने और प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में जल संकट गहराने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। पहले भी गर्मी के मौसम में जलापूर्ति को लेकर चुनौतियां सामने आती रही हैं। यदि अवैध रेत खनन, सीवेज का प्रवाह और किनारों पर अतिक्रमण नहीं रुके, तो जबलपुर को भविष्य में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। जबलपुर में नर्मदा का सबसे प्रमुख और आकर्षक स्थल भेड़ाघाट है, जहां संगमरमर की चट्टानों के बीच बहती नर्मदा शहर की पहचान बन चुकी है। इसके अलावा गौरीघाट और तिलवाराघाट जैसे घाट धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। यदि नदी का प्रवाह घटता है या प्रदूषण बढ़ता है, तो इन स्थलों का अस्तित्व और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित होंगे। अवैध निर्माण बड़ी समस्या… पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जबलपुर में नर्मदा के किनारों पर तेजी से बढ़ती आबादी, अवैध निर्माण और अपशिष्ट प्रबंधन की कमी बड़ी समस्या है। कई नालों का पानी सीधे नदी में मिलने की शिकायतें समय-समय पर उठती रही हैं। यदि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता नहीं बढ़ाई गई, तो प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। सरकार बनाएगी समिति… नर्मदा संरक्षण के लिए सरकार ने त्रि-स्तरीय समिति बनाने की घोषणा की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई होगी? जबलपुर जैसे बड़े शहर में निगरानी, सख्त कार्रवाई और जनभागीदारी के बिना स्थिति सुधरना मुश्किल माना जा रहा है। संस्कारधानी की पहचान, आस्था और अर्थव्यवस्था तीनों नर्मदा से जुड़ी हैं। ऐसे में नर्मदा पर मंडराता खतरा केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि जबलपुर के भविष्य से जुड़ा सवाल है। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर इस जीवनदायिनी नदी को बचाने के लिए कितनी गंभीर पहल करते हैं। सुनील साहू / शहबाज / 17 अप्रैल 2026/ 06.15