रायपुर(ईएमएस)। छत्तीसगढ़ में 1 मई 2026 से शुरू होने वाली जनगणना को लेकर विवाद तेज हो गया है। भीषण गर्मी के मौसम में शिक्षकों को घर-घर जाकर सर्वे का काम सौंपे जाने के फैसले पर छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने तीखा विरोध जताया है। शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि मई-जून की प्रचंड गर्मी में शिक्षकों को फील्ड ड्यूटी पर भेजना पूरी तरह अव्यवहारिक और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा, “एक तरफ स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां होती हैं, दूसरी तरफ शिक्षकों को घर-घर सर्वे के लिए भेजा जा रहा है। इससे उन्हें अनावश्यक परेशानी और स्वास्थ्य जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।” भीषण गर्मी में घर-घर जाकर जनगणना कार्य करना व्यावहारिक नहीं है। जनगणना के लिए एंड्रॉयड 12.0 या उससे ऊपर का स्मार्टफोन अनिवार्य कर दिया गया है। जिन शिक्षकों या कर्मचारियों के पास पुराना मोबाइल है, उन्हें नया फोन खरीदने की मजबूरी पड़ रही है। गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों को फील्ड में लगाना उचित नहीं। प्रदेश में जनगणना 2027 के पहले चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस) का काम 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान प्रत्येक परिवार, मकान और बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक नागरिक खुद ऑनलाइन पोर्टल पर सेल्फ-एन्यूमरेशन कर सकते हैं और यूनिक आईडी प्राप्त कर सकते हैं। सर्वे में कुल 33 बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी, जिसमें मकान की स्थिति, निर्माण गुणवत्ता, परिवार संख्या, पेयजल, शौचालय, बिजली, ईंधन, इंटरनेट जैसी सुविधाओं के अलावा वाहनों का विवरण भी शामिल है। शिक्षक संघ ने प्रशासन से मांग की है कि गर्मी को देखते हुए ड्यूटी में बदलाव किया जाए और स्मार्टफोन की अनिवार्यता को लेकर भी पुनर्विचार किया जाए। सत्यप्रकाश(ईएमएस)18 अप्रैल 2026