नई दिल्ली (ईएमएस)। देश के कुछ हिस्सों में बाल विवाह की घटनाओं को लेकर चिंता के बीच, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर बाल विवाह रोकने के लिए तत्काल और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विजया रहाटकर ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों को भी पत्र लिखकर कानून के सख्त पालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह परामर्श राज्य महिला आयोगों की अध्यक्षों को भी भेजा गया है, ताकि वे सतर्क निगरानीकर्ता के रूप में कार्य करते हुए बाल विवाह की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसरों पर पारंपरिक मान्यताओं और सामूहिक विवाह समारोह के कारण बाल विवाह के मामले बढ़ जाते हैं। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत प्रतिबंध के बावजूद यह प्रथा जारी है, जो बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास पर गंभीर प्रभाव डालती है।बाल विवाह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। इसमें केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि विवाह में शामिल सभी व्यक्ति—जैसे दूल्हा, पुजारी और विवाह स्थल के संचालक आदि भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आते हैं। कानून के तहत दोषियों को दो वर्ष तक के कठोर कारावास और ₹1 लाख तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। सुबोध/१८ -०४-२०२६