राज्य
18-Apr-2026


बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का लैंसडाउन चैक पर प्रदर्शन, राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित देहरादून (ईएमएस)। देश में बढ़ती विकृत जिहादी मानसिकता, अवैध कब्जों एवं सुनियोजित षड़यंत्रों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने लैंसडाउन चैक पर जोरदार नारेबाजी के बीच प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। बाद में जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। यहां बजरंग दल के कार्यकर्ता जिला संयोजक कमल बिजल्वाण के नेतृत्व में लैंसडाउन चैक पर इकटठा हुए और वहां पर जोरदार नारेबाजी के बीच प्रदर्शन किया। इस अवसर पर बिजल्वाण ने कहा कि बजरंग दल के कार्यकर्ता इस ज्ञापन के माध्यम से देश में वर्तमान में व्याप्त गम्भीर चुनौतियों और समाज विरोधी गतिविधियों की ओर आपका ध्यानाकर्षण करना चाहते हैं। देश के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-बिन्न करने वाली विकृत जिहादी मानसिकता वर्तमान में राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और सद्भाव के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। इस दौरान ज्ञापन में कहा गया कि देश भर से आये विभिन्न मामलों में पुरुषों के साथ महिलाएं भी इस विकृत कार्य में सम्मलित पाई गई। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि हाल में नासिक (टीसीएस) जैसी प्रतिष्ठित सस्थानों के आसपास उजागर हुए प्रकरणों से स्पष्ट है कि लव जिहाद का जाल अब सुशिक्षित समाज और व्यवसायिक क्षेत्रों तक फेल चुका है। उत्तर प्रदेश के जिहादी छंगुर उर्फ जमालुद्दीन और उसकी महिला सहयोगी नसरीन ने अनेकों हिन्दू कन्याओं का शारीरिक शोषण कर ब्लैकमेल और जबरन धर्मान्तरण करवाया। ज्ञापन में कहा गया कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी आतंकी कनैक्शन दिल्ली लाल किला ब्लास्ट में भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े जिहादी मानसिकता के मुस्लिम चिकित्सकों ने बम ब्लास्ट किया, जिसमें महिला चिकित्सक शाहीन भी सम्मिलित थी। देश के विभिन्न नगरों में आरक्षित वन भूमि सार्वजनिक भूमि, रेल विभाग एवं सेना की सुरक्षित भूमि पर सुनियोजित तरीके से अवैध कब्जे किये जा रहे हैं. जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती है। ज्ञापन में कहा गया कि समाज में वैमनस्य फेलाने के उद्देश्य से व्वानमान की वस्तुओं को अपवित्र करने की घटनाएं निरंतर प्रकाशित हो रही हैं, जिससे नागरिकों की धार्मिक भावनाओं और स्वास्थ्य के प्रति खिलवाड़ हो रहा है। मुस्लिम बाहुल क्षेत्रों में अल्पसंख्यक हिन्दू परिवारों और जनजाति समाज की अवयस्क बालिकाओं का शारीरिक एवं मानसिक शोषण कर उन्हें पलायन के लिए विवश किया जा रहा है। शैलेन्द्र नेगी/ईएमएस/18 अप्रैल 2026