:: हाईकोर्ट में जारी रही सुनवाई; एएसआई ने 2000 पन्नों की रिपोर्ट पर रखा अपना पक्ष, आज भी जारी रहेंगे तर्क :: इंदौर (ईएमएस)। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के मामले में माननीय उच्च न्यायालय में सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट को अवगत कराया कि यह पहला अवसर नहीं है जब भोजशाला का वैज्ञानिक सर्वे किया गया है। इससे पूर्व एएसआई ने वर्ष 1902 में भी यहाँ विस्तृत सर्वे किया था, जिसमें शिलालेखों पर श्लोक और प्राचीन मूर्तियां प्राप्त हुई थीं। एएसआई के वकील ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सर्वे 98 दिनों में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से पूर्ण कर दो हजार पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। इस भवन को वर्ष 1958 में संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया गया था। हाईकोर्ट में जारी पांच याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने पूर्व में तर्क दिया था कि एएसआई के सर्वे से यह सिद्ध होता है कि भोजशाला का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था। तब मालवा क्षेत्र में मुगलों का आगमन भी नहीं हुआ था। याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि कालांतर में भोजशाला के मूल स्वरूप में परिवर्तन कर अवैध कब्जे किए गए। सुनवाई के दौरान बारी-बारी से सभी पक्षकारों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे इस ऐतिहासिक स्थल की पुरातात्विक स्थिति स्पष्ट हो सके। मामले में हस्तक्षेपकर्ता (इंटरविनर) के रूप में धार निवासी जिब्रान अंसारी व अन्य की ओर से उनके अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि इस परिसर में वर्षों पूर्व मस्जिद अस्तित्व में थी और पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों सहित रियासतकालीन गजट में भी इसका उल्लेख मिलता है। अपने तर्कों के समर्थन में उन्होंने वर्ष 1952 की एएसआई रिपोर्ट का भी हवाला दिया। इस पक्ष का दावा है कि परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर विभिन्न सरकारी दस्तावेजों में अलग जानकारी दर्ज है। :: आज भी जारी रहेगी सुनवाई :: सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान समय की कमी के कारण बहस अधूरी रही। माननीय न्यायालय ने अब मंगलवार को भी सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है, जिसमें एएसआई को पुनः अपना पक्ष विस्तार से रखने का मौका दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य हस्तक्षेपकर्ताओं ने भी प्रकरण में अपने तर्क प्रस्तुत करने की इच्छा जताई है। फिलहाल कोर्ट सभी पक्षों को गंभीरता से सुन रहा है, जिसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकेगा। प्रकाश/20 अप्रैल 2026