गुमला(ईएमएस)।गुमला के खोरा जामटोली गांव से वर्ष 2018 में लापता हुई चंद्रमुनि उरांव की 13 वर्षीय बेटी के मामले में एक बार फिर पुलिस की हलचल तेज हो गयी है। झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद पुलिस महकमा हरकत में आ गया है।राज्य की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा खुद इस संवेदनशील मामले की मॉनिटरिंग कर रही है।सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जतायी थी।हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यदि अगले दो सप्ताह में जांच में ठोस प्रगति नहीं हुई तो मामले को सीबीआइ को सौंप दिया जायेगा। हाईकोर्ट के इस कड़े रूख के बाद डीजीपी तदाशा मिश्रा मंगलवार को गुमला पहुंची। सर्किट हाउस में उन्होंने गायब किशोरी के परिजनों से मुलाकात किये। उनसे कई बिंदुओं पर पूछताछ की गयी. इसके बाद जिन लोगों पर किशोरी को गायब करने का आरोप लगा है। उन लोगों को भी गुमला पुलिस ने डीजीपी के सामने प्रस्तुत किया।डीजीपी ने उन लोगों से भी कई सवाल जवाब किये। साथ ही किशोरी कहां है।इसकी जानकारी प्राप्त करने का प्रयास की।डीजीपी ने अनुसंधानकर्ताओं की क्लास ली।गायब किशोरी के केस से जुड़े सभी अनुसंधानकर्ताओं की डीजीपी ने क्लास ली। अब तक की कार्रवाई का विस्तृत लेखा-जोखा मांगा गया। विभिन्न जिलों से भी अनुसंधानकर्ता गुमला पहुंचे थे।सर्किट हाउस में डीजीपी के साथ गुमला डीसी दिलेश्वर महतो व एसपी हारिश बिन जमां सहित कई अधिकारी थे। डीजीपी ने समीक्षा के दौरान अब तक की जांच की प्रगति की जानकारी ली। केस के अनुसंधानकर्ताओं को इस मामले में तेजी से काम करने के लिए कहा है।डीजीपी तदाशा मिश्रा ने छानबीन व पूछताछ के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि लापता किशोरी के केस के मामले में गुमला आयी हूं।लापता किशोरी के मामले में काफी मेहनत हुई है।पूर्व में भी मेहनत की गयी है। लेकिन अभी तक कुछ सुराग हाथ नहीं लगा है।नये सिरे से मामले का रिव्यू किया गया है। शिकायतकर्ता व आरोपी के साथ साथ गांव से परिवार के लोगों व ग्रामीणों समेत अनुसंधकर्ता को बुलाकर पूछताछ किया गया है। आरोपी महिला के ऊपर कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। कार्रवाई आगे जारी है। डीजीपी ने एक सवाल पर कहा कि बच्चे लापता होते हैं बरामद की जाती है।पहले से लापता बच्चों के मामले को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गयी है। टास्क दिया गया है।ऐसे मामजों में अभिभावकों को जागरूक किया जायेगा। स्कूलों को भी सचेत किया जायेगा। किसी भी हाल में बच्चो को भटकने नहीं दिया जायेगा।गुमला की 13 वर्षीय लड़की के मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो खोरा जामटोली निवासी चंद्रमुनि उरांव की बेटी वर्ष 2018 में अचानक लापता हो गयी थी। इस संबंध में गुमला थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिलने पर उसकी मां ने सितंबर 2018 में हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी।तब से यह मामला अदालत की निगरानी में चल रहा है। पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि जांच के लिए नई विशेष जांच टीम एसआइटी गठित की गयी है।पुलिस टीम लड़की की तलाश में दिल्ली तक गयी और कई स्थानों पर छानबीन की। बच्ची का फोटो विभिन्न प्लेटफॉर्म पर भी अपलोड कराया गया है लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। इधर, जांच को तेज करते हुए पुलिस हर एंगल से पड़ताल कर रही है। लड़की को गायब करने के आरोप में एक वृद्ध महिला से लगातार पूछताछ की जा रही है। बीते मंगलवार को भी उसे गुमला थाना बुलाकर घंटों पूछताछ की गयी थी। पुलिस पुराने रिकॉर्ड खंगालने, स्थानीय लोगों से पूछताछ और संदिग्ध गतिविधियों की जांच में जुटी है। इस बीच, आठ फरवरी 2026 की रात पीड़िता की मां चंद्रमुनि उरांव के साथ मारपीट की घटना भी सामने आयी थी। आरोप है कि उसे ‘डायन’ कहकर प्रताड़ित किया गया। इस मामले में भी हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था।हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने अलग प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।डीजीपी के आगमन के बाद स्थानीय परिसदन में उन्हें एसपी हारिश बिन जमां ने बुके देकर स्वागत किया।डीजीपी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद वापसी के दौरान उन्हें पुनः गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।साथ ही एसपी हारिश बिन जमां ने प्रतीक चिन्ह भेंट की। मौके पर गुमला शहर से लेकर सर्किट हाउस तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम था।जगह-जगह पर पुलिस बल तैनात किया गया था।सुबह साढ़े आठ बजे से ही पुलिस टीम सड़कों पर आ गयी थी।पुलिस की निगरानी बढ़ने के बाद मंगलवार को गुमला शहर में जाम कम दिखा. क्योंकि, गुमला शहर की सड़कों पर वाहनों को बेवजह खड़ी करने नहीं दिया गया।यहां तक कि बसों में यात्रियों के बैठाने व उतारने पर भी पुलिस की नजर थी। कर्मवीर सिंह/21अप्रैल/26