लेख
22-Apr-2026
...


चाहिए जब भारत देश की बात आती है तो हम ना किसी धर्म से जुड़े हैँ ना किसी के बहकावे में आकर देश से धोखा करेंगे क्योंकि मातृभूमि से बढ़कर कुछ भी नहीं है हमारी ताकत हमारी मातृभूमि की रक्षा के लिए मर मिटने के लिए एकजुट होकर भाईचारे से रहकर देश के प्रति एक जबाबदारी होनी चाहिए जब बीजेपी ने अन्य दलों के साथ मिलकर 1998 में पहली बार गैर कोंग्रेसी सरकार आयी तो तुरंत ही उन्होंने 11मई 98 को पोखरण परमाणु परीक्षण कर देश को अपनी ताकत का अहसास कराया आपका सच्चा धर्म अपने देश के प्रति वभादार होना है पोखरण परमाणु परीक्षण के लिए हमारे वैज्ञानिकों को तैयारी करने और पूर्वाभ्यास करने के लिए दिन रात जुटे रहें सिर्फ डेढ़ साल का समय मिला था। इस मिशन की गोपनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता थी।सन 1997 तक भारत परमाणु परीक्षण को लेकर इसे पुनः परीक्षण के लिए भारत के मशहुर वैज्ञानिक डॉ एपीजे कलाम व डॉ आर चितंबरम इसे कई बार उस समय के सरकार के पास जाकर उन्हें जानकारी दी थी लेकिन सीटीबीटी व अमेरिका व अन्य देशों के डर के कारण रोक दिया गया था जब 1998 में स्व पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की सरकार आई तो इसका नेतृत्व करते महान भारतीय वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को पुरी छुट दी उन्होंने कहा आप सभी वैज्ञानिक जब चाहें तब करें मुझे ऐ मत बताइए कब करना है उन्होंने साफ कहा कि पार्टी रहे या नहीं रहे इसकी चिंता नहीं है देश सर्वोपरि है अतः आप जैसे चाहे वैसे करें देश की रक्षा सर्वोपरि है इसके लिए देश के पास परमाणु अस्त्र होना जरुरी है इसकी भनक अमेरिका को लगी इसके लिए अमेरिका ने नासा में उस समय डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को बुलाया और नासा के निदेशक पद का ऑफर दिया स्व डॉ कलाम सर ने उन्हें मना तो नहीं किया लेकिन यह मामला फंस गया बने या न बने उन्होंने इसलिए ऐसा किया क्योंकि वो जानते थे मेरे लिए देश सर्वोपरि है और मैं अकेला हूं अतः वो वहां जाकर ऐ जान गए कि भारत के परमाणु परीक्षण को लेकर अमेरिका ने सैटेलाइट लगा दिया है अतः भारत आने के बाद उन्होंने इस कार्यक्रम की रुपरेखा तैयार की उन्होंने परमाणु परीक्षण से जुड़े सभी वैज्ञानिकों को बताया कि यहां सैन्य अभ्यास की तैयारी कर उस मिशन को पूरा करने की कोशिश की जाए व यह काम सैटेलाइट जाने के ठीक ढ़ेड (1।5) के पहले ही करना होगा बाद में इसकी खबर पाकिस्तान के गुप्तचरों ने अमेरिका को बता दिया और अमेरिका ने सैटेलाइट घुमाने की अवधि करीब आधा घंटा कर दिया इससे पहले पता चलता वैज्ञानिकों ने सेना की वर्दी पहने व आधे घंटे के अंदर ही घास फूस का मचान/छत जैसा तैयार कर निचे घुस कर बहुत ही कठिन परिस्थितियों में गठ्ठा खोदने का काम किया जिसमें परमाणु परीक्षण किया जाता है।भारत जब पोखरण में ऑपरेशन शक्ति के तहत सफल परमाणु परीक्षण करने की तैयारी कर रहा था, तो इसकी भनक किसी भी दूसरे देश को नहीं थी। यहां तक की परमाणु परीक्षण होने के बाद भी इसकी जानकारी किसी को नहीं लगी थी। भारत की सरकार के लिए उस वक्त से बहुत चुनौतीपूर्ण काम था, क्योंकि अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) भारत की हरकतों पर पल-पल नजर बनाए रखता था। सीआईए ने भारत पर नजर रखने के लिए अरबों खर्च कर 4 सैटेलाइट लगाए थे। 24 सितंबर 1996 को अमेरिका ने परमाणु विकसित देशों से मिलकर एक संधि सीटीबीटी यानी कांप्रेहेन्सिव टेस्ट बैन ट्रीटी नामक एक समझौता लागू किया गया जिसके जरिए परमाणु परीक्षणों करने के लिए प्रतिबंधित लागू किया गया है यह संधि अस्तित्व उस समय अस्तित्व में आई जब भारत परमाणु परीक्षण के लिए पुरी तरह से तैयार हो गया था। 1997 तक भारत परमाणु परीक्षण को लेकर इसे पुनः परीक्षण के लिए भारत के मशहुर वैज्ञानिक डॉ एपीजे कलाम व डॉ आर चितंबरम के अगुआई में इसे कई बार उस समय के सरकार के पास जाकर उन्हें जानकारी दी थी लेकिन सीटीबीटी मसौदा, अमेरिका व अन्य देशों के डर के कारण इस मिशन को रोक दिया गया था जब 1998 में एनडीए की सरकार आई तो स्व पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी ने इस मिशन को पुरा करने के लिए वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को प्रोत्साहित किया जो इसका नेतृत्व कर रहे थे डा कलाम को इस मिशन को पुरा करने की पुरी छुट दी उन्होंने कहा आप सभी वैज्ञानिक जब चाहें तब परीक्षण करें मुझे ऐ मत बताइए कब करना है उन्होंने साफ कहा कि मेरी सरकार रहे या ना रहे है।पोखरण परमाणु परीक्षण 2- 11,मई 1998 को पोखरण राजस्थान में आयोजित किया गया था। पोखरण 2 का कोड वर्ड (नाम ) ऑपरेशन शक्ति था। यह भारत द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण का दूसरा उदाहरण था। पहला परीक्षण, के कोड -का नाम स्माइलिंग बुद्धा मई 1974 में आयोजित किया गया था। इसमें सिर्फ अनियंत्रित नाभिकीय विखंडन के द्वारा किया गया एटम बम का परिक्षण किया गया था लेकिन 11मई,98 को किए गए परमाणु परीक्षण उससे कहीं और ज्यादा शक्तिशाली था व उसमें अनियंत्रित नाभिकीय विखंडन के अलावा नाभिकीय संलयन की क्रिया भी की गई थी, जिसे हाइड्रोजन बम के नाम से भी जाना जाता है। परीक्षणों के कुछ ही समय बाद, प्रधानमंत्री वाजपेयी प्रेस के सामने आए और जिसे पुरी दुनिया को राष्ट्र के नाम के संदेश में कहा था उन्होंने यह संक्षिप्त बयान दिया: आज 15:45 बजे, भारत ने पोखरण रेंज में तीन भूमिगत परमाणु परीक्षण किए। आज किए गए ये परीक्षण एक विखंडन उपकरण, एक अधिक क्षमता वाले परमाणु उपकरण और एक थर्मोन्यूक्लियर उपकरण के साथ किए गए थे थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस, या हाइड्रोजन बम (H-बम), दूसरी पीढ़ी का एक परमाणु हथियार है जो उच्च तापमान वाली परमाणु संलयन प्रतिक्रिया को शुरू करने के लिए एक प्राथमिक विखंडन विस्फोट का उपयोग करता है। ये हथियार बुनियादी विखंडन हथियारों की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी शक्ति (मेगाटन रेंज) उत्पन्न करते हैं, और भारी विस्फोट करने के लिए ड्यूटेरियम और ट्रिटियम का उपयोग करते हैं।इसमें कलाम साहब की बहुत बड़ी भूमिका रही थी क्योंकि उन्होंने नासा के निदेशक पद का ऑफर ठुकरा कर अपने देश का नाम रौशन किया हालांकि वो हिन्दू नहीं थे लेकिन देश के लिए उनका यह कार्य लोग सदियों तक याद करेगा उसके बाद अमेरिका ने भारत के ऊपर कई सैंक्शन लगाएं लेकिन इससे अमेरिका को नुकसान हो रहा था इसलिए बाद में हटा दिया इसके बाद 1999 में कारगिल युद्ध हुआ जहाँ कारगिल युद्ध (कारगिल युद्ध), जो मई से जुलाई 1999 तक जम्मू और कश्मीर के कारगिल जिले में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ा गया था, पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा घुसपैठ की गई ऊंचाई वाली जगहों को वापस पाने के लिए भारत का एक सफल मिलिट्री ऑपरेशन था। भारत ने घुसपैठियों को निकालने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया, जिससे 26 जुलाई, 1999 को लड़ाई आधिकारिक तौर पर खत्म हो गई। कारगिल युद्ध की खास बातें: कारण: पाकिस्तानी सैनिकों और मिलिटेंट्स ने लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LoC) पार करके घुसपैठ की, और सर्दियों के दौरान स्ट्रेटेजिक, बिना पायलट वाली भारतीय मिलिट्री पोस्ट पर कब्ज़ा कर लिया। जगह: लद्दाख का कारगिल जिला, खासकर श्रीनगर-लेह हाईवे (NH 1A) को निशाना बनाकर। भारतीय कार्रवाई: भारत ने इलाके को वापस पाने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया, जिसमें लगभग 200,000 भारतीय सैनिक शामिल थे और आर्टिलरी, खासकर बोफोर्स तोपों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। लड़ाई का समय: यह लड़ाई दो महीने से ज़्यादा चली, जो मई की शुरुआत में शुरू हुई और 26 जुलाई, 1999 को खत्म हुई। मौत: 527 भारतीय सैनिकों की जान गई, और 1363 घायल हुए, ऐसा बताया गया है। नतीजा: भारत ने पाकिस्तानी सेना को लाइनऑफ कण्ट्रोल पार करने में कामयाबी हासिल की। भारतीय सेना की बहादुरी के सम्मान में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। खास लड़ाइयों में ज़रूरी ऊँची चोटियों पर फिर से कब्ज़ा करना शामिल था, जिसमें सैनिकों ने दुश्मन की तेज़ फायरिंग के बावजूद 70-80 डिग्री की ढलान पर बहुत हिम्मत दिखाई थी ऐ भारतीय सेना को गौरवान्वित करती है उस समय कारगिल युद्ध भारत के लिए एक कड़वा सबक साबित हुआ, जब अमेरिका ने पाकिस्तानी सेना के ठिकानों का पता लगाने के लिए जीपीएस एक्सेस देने से इनकार कर दिया। हालांकि भारत जीत गया, लेकिन जीपीएस इनकार वाली घटना ने नई दिल्ली को नेविगेशन विद इंडिया कॉन्स्टेलेशन बनाने पर मजबूर कर दिया—हमारा अपना स्वदेशी पोज़िशन ट्रैकर सिस्टम नाविक है अमेरिका भारत के प्रति खुब मीठा मीठा बोलता है व्यापार की दृष्टि से और बाद में धोखा देता है उस समय अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियार और सेटेलाइट इमेज दिया था जिससे हमारे सेना को काफी जोखिमो का सामना करना पड़ा और शहीद हुए कारगिल युद्ध भले ही सिमित संसाधनों से लड़ा गया युद्ध हो लेकिन ऐ भारतीय सेना के शौर्य और बहादुरी का प्रतिक है जो इतिहास के पन्नों में भारतीय सेना की जज्बा उनकी शहादत और वीरता की कामयाबी को हमेशा नमन करेगी जो मातृभूमि की रक्षा के लिए शहीद हुए सेना का सम्मान उस समय इस कदर हुआ की जो भी जिस राज्य से गाँव से शहीद हुए वहाँ के गली का नाम व उनका स्टैचू लगाया गया जिसे लोग नमन करते हैँ बाद में पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी ने इस जीत के जश्न को एक कविता में समेटा था चिंगारी का खेल बुरा होता है,एक नहीं दो नहीं करो अमेरिका से बीसों समझौते पर स्वतन्त्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा, अगणित बलिदानो से अर्जित यह स्वतन्त्रता, अश्रु स्वेद शोणित से सिंचित यह स्वतन्त्रता, त्याग तेज तपबल से रक्षित यह स्वतन्त्रता, दु:खी मनुजता के हित अर्पित यह स्वतन्त्रता आज पता नहीं कैसा युद्ध होता है कि कौन जीता कौन हारा मालूम ही नहीं होता आज हर जगह पहले युद्ध होता है और खुब बम बरसते हैँ बाद में दोनों तरफ नुकसान होता है और दोनों ही अपने अपने जीत का दावा करते हैँ 3साल से अधिक यूक्रेन और रूस में युद्ध चल ही रहा है क़ोई कहता है हमने उसका इतना बड़ा इलाके को कब्ज़ा कर लिया फिर बाद में मालूम होता है ड्रोन की बमबारी से पीछे हटना पड़ा इजराइल -अमेरिका और ईरान युद्ध भी कुछ इसी तरह का हो गया 43 दिन बाद भी अमेरिका को वो कामयाबी नहीं मिली जिसकी उसे आशा थी बाद में रात में सभ्यता ख़त्म करने की बात और सुबह शान्ति दूत बन गए फिर सीजफायर और शान्ति वार्ता वो भी वहाँ पाकिस्तान में जो आतंकवादी का गढ़ है आखिर एक बार पहले वार्ता हुई तो पुरी तरह असफल रहा अब दूसरी बार हो रही है वो भी असफल ही रहेगा क्योंकि इसमें इजराइल का बहुत बड़ा रोल है जो मिडिल ईस्ट में अमेरिका के वर्चस्व को बनाए रखता है हालांकि भारत के ऑपरेशन सिंदूर हो या सर्जिकल स्ट्राइक उसने मदद की है चाहे आप बुरा माने या भला, इसलिए भारत के प्रधान मंत्री युद्ध से कुछ दिन पहले इजराइल के प्रधानमंत्री से मिले और उसके साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत दूसरे देशों के साथ दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाया हो तुर्की में जब भूकंप आया तो सबसे पहले भारत ने ही अपने बचाव दल को भेजा था लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में तो उसने भारत के पीठ में ही छुरा घोप दिया और पाकिस्तान को ड्रोन दिया जिससे भारत का उतना नुकसान तो नहीं हुआ लेकिन उसकी दगाबाजी की नियत साफ दिख गईं आखिर अमेरिका जैसा सुपर पावर बार बार पाकिस्तान में ही शान्ति समझौता क्यों कर रहा है इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है जानकर सूत्रों के अनुसार अमेरिका बिना प्लानिंग के साथ इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमले किये उससे अमेरिका को काफी नुकसान हुआ और अब कुछ समय के लिए तालकर फिर से नए तरीके से हमले की योजना बना रहा है और उसपर हार्मोज खुलने का पूरे देश का दबाव है लेकिन वो ईरान ने पुरी तरह बन्द कर दिया है और टोल लिया जा रहा है इधर अमेरिका ने हार्मोस का रास्ता नेवी से ब्लॉक कर दिया है और ईरान के एक मालवाहक जहाज को कब्जे में लिया है लेकिन ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा है कि वह जलडमरूमध्य के निकट ईरानी झंडे वाले एक मालवाहक जहाज़ को ज़ब्त किए जाने पर जल्द ही जवाब देगी।2025 में पाकिस्तान के सेना के चीफ मार्शल ने अमेरिका के वाइट हाउस में उस समय डिनर में जब इजराइल ईरान में एक छोटा सा युद्ध हुआ तो इजराइल ने 200 से अधिक फाईटर जेट से ईरान पर हमला तो कर दिया लेकिन ईरान की हाइपर सोनिक मिशायल से इजराइल को काफी नुकसान पहुँचाया था बाद में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत बंकर ब्लस्टर बम और टॉमहॉम मिशायल से ईरान के तीन परमाणु ठिकानों को नष्ट तो नहीं कर पाया लेकिन नुकसान पहुँचाया था तब पाकिस्तान में इसे लेकर वहाँ बड़ा बबाल हुआ और ईरान पाकिस्तान को धमकी भी दे डाली और वहीँ अब दूसरी शान्ति वार्ता हो रही है अब इसके क्या मायने निकाल सकते हैँ ईरान भी धर्म के नाम पर उसपर भरोसा कर रहा है जानकार सूत्रों के जो नतीजा बता रहा है दरअसल अमेरिका ईरान पर बहुत बड़े हमले की तैयारी कर रहा है उसके लिए वो समय को खींच रहा है चूँकि ईरान में युद्ध में आर्थिक हालत बहुत ही ख़राब चल रहा है इसलिए ईरान भी युद्ध में और अधिक खींचने के चक्कर में नहीं है लेकिन अमेरिका इसे कुछ समय के लिए इसलिए टाल रहा है कि नाटो देश का समर्थन इस युद्ध में नहीं है ऐ तो दरार बहुत पहले से दिख रहा था बस एक बहाना चाहिए था और नाटो आज भी यूरोप में एकजुट है और यूक्रेन को मदद कर रहा है इसलिए अमेरिका युद्ध को सीजफायर और शान्ति वार्ता के नाम कुछ और दिन टालेगा बाद में ईरान पर बहुत बड़ा हमला करेगा ऐ जबकारों का मानना है।कि आने वाले दिनों में और भी विनाशकारी युद्ध होगा। ईएमएस / 22 अप्रैल 26