-पहलगाम हमले में लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को यादकर पिता का छलका दर्द करनाल,(ईएमएस)। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकियों ने निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाया और 26 मासूम जिंदगियां छीन ली। इसी हमले में करनाल के सेक्टर-6 निवासी भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी शहीद हो गए। एक साल बाद भी उनके पिता राजेश नरवाल बेटे को याद करके भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल की वह खबर उनकी जिंदगी को दो हिस्सों में बांट गई। उससे पहले की जिंदगी और उसके बाद की जिंदगी में उतना ही फर्क है, जितना अर्श और फर्श में है। पहले जीवन में सुकून और संतोष था, लेकिन अब हर पल एक भारी बोझ जैसा लगता है। इस दर्द को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि परिवार के मुखिया होने के नाते उन्हें अपने बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और बेटी को संभालना पड़ता है, लेकिन अपना दुख किसी से कह पाना भी आसान नहीं। मैं अपना दर्द भी परिवार के सदस्यों के साथ साझा नहीं कर सकता हूं, क्योंकि जब भी बात होगी तो सारे लोग भावुक हो जाते हैं। घर का माहौल गमगीन हो जाता है। इन परिस्थितियों में बस किसी तरह से परिवार को साथ लेकर जिंदगी में आगे बढ़ रहे हैं। राजेश नरवाल ने कहा कि जब तक शरीर में सांस है, तब तक जीना ही होगा, लेकिन बेटे के निधन के बाद ही पूरी जिंदगी खत्म हो चुकी है। अब जिंदगी में खुशी और उत्साह जैसा कुछ नहीं है। बता दें विनय नरवाल ने युवावस्था में ही भारतीय नौसेना में अधिकारी के रूप में चयन हासिल किया था। उनके पास आगे बढ़ने के कई सपने थे, जिन्हें उन्होंने अपनी डायरी में संजोकर रखा था। पिता बताते हैं कि जब भी वह डायरी पढ़ते हैं, तो लगता है कि विनय ने जो सोच रखा था, उसे पूरा करना आसान नहीं। उन्होंने कहा कि मैं कोशिश करता हूं, लेकिन पता नहीं कब इतनी हिम्मत जुटा पाऊंगा कि उसके सपनों को आगे बढ़ा सकूं। बेटे को याद करते हुए उन्होंने कहा, विनय बेहद सरल, मिलनसार और मददगार स्वभाव का था। उसने कभी किसी से झगड़ा नहीं किया और हर किसी की मदद के लिए हमेशा आगे रहता था। सरकार और प्रशासन के सहयोग को लेकर उन्होंने कहा कि घटना के बाद सरकार और प्रशासन ने हर संभव सहयोग किया। सभी जरूरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी की गईं और आज भी अधिकारी समय-समय पर परिवार का हाल-चाल पूछते रहते हैं। यह सहारा कठिन समय में एक संबल बना हुआ है। राजेश नरवाल ने मांग की कि उनके बेटे विनय के नाम पर कोई संस्थान बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान को याद रख सकें। उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्होंने पहले भी सरकार से अपील की थी। सिराज/ईएमएस 22अप्रैल26