राष्ट्रीय
22-Apr-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और धार्मिक भेदभाव से जुड़े मामले में सुनवाई हुई। जस्टिस वीबी नागरत्ना ने कहा, हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए। दो संप्रदायों में बांटना नहीं चाहिए। वे हमारे मंदिर नहीं आ सकते, हम उनके मंदिर में नहीं जा सकते। यह सोच सही नहीं है। अगर कोई संप्रदाय अपने मंदिर को दूसरों के लिए नहीं खोलता, तब वहां कमजोर हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह बात ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के वकील राकेश द्विवेदी की उस बात पर कही, जिसमें कहा गया था कि जहां एक संप्रदाय को दूसरे संप्रदाय के मंदिर में पूजा करने से रोका जा रहा है, जबकि वे वहां जाते भी नहीं। यदि वे जाना चाहें, तब क्या इस काम को सामाजिक सुधार के तहत सही ठहराया जा सकता है। अगर राज्य चाहे कि अन्य संप्रदायों के लोगों को भी अनुमति दी जाए, तब वह सुधार के रूप में कानून बना सकता है। सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संवैधानिक बेंच सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही है। इसके साथ धार्मिक आस्था के 66 मामले और जुड़े हैं। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है। आशीष दुबे / 22 अप्रैल 2026