क्षेत्रीय
22-Apr-2026
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गुना (ईएमएस)। दो दशक पुराने विवाद में न्यायालय के आदेशों की अनदेखी जल संसाधन विभाग को भारी पड़ गई। बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायालय के निर्देश पर न्यायालय की टीम ने विभाग के दफ्तर पहुंचकर कुर्की की कार्रवाई की। टीम ने मौके से टेबल-कुर्सी, कंप्यूटर, पंखे और अन्य फर्नीचर जब्त कर लिया। यह कार्रवाई उस स्थिति में की गई, जब वर्षों से लंबित मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया। मामला ग्राम रेंझाई निवासी अर्जुन सिंह रघुवंशी से जुड़ा है, जिनकी जमीन से नहर निकालने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। पीड़ित पक्ष के अनुसार तालाब निर्माण के दौरान उनके खेत से जबरन नहर निकाली गई, जबकि निर्धारित मार्ग किसी अन्य खेत से था। इसको लेकर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने जल संसाधन विभाग को मुआवजा राशि अदा करने के निर्देश दिए थे। न्यायालय के आदेश दिनांक 8 फरवरी 2022 के अनुसार विभाग को लगभग 1,00,475 रुपये की राशि अदा करनी थी, लेकिन निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद भी विभाग को कई अवसर दिए गए, मगर राशि जमा नहीं होने पर न्यायालय ने आदेश 21 नियम 30 के तहत जंगम संपत्ति कुर्क करने का वारंट जारी कर दिया। प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश के न्यायालय से जारी इस वारंट के पालन में जिला नाजिर के नेतृत्व में टीम जल संसाधन विभाग कार्यालय पहुंची। न्यायालय के कर्मचारी राजेश शर्मा ने बताया कि बार-बार निर्देशों के बावजूद विभाग ने भुगतान नहीं किया, जिसके चलते कुर्की की कार्रवाई की गई। जब्त किए गए सामान को न्यायालय में जमा कराया जाएगा, जहां से आगे नीलामी की प्रक्रिया होगी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस मामले में उन्हें न्याय पाने के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। करीब 10-12 साल तक केस चलने के बाद फैसला उनके पक्ष में आया, लेकिन मुआवजा मिलने में और देरी होती रही। अंततः न्यायालय को सख्त कदम उठाना पड़ा। यह कार्रवाई प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। अब कुर्की के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लंबित राशि की वसूली जल्द हो सकेगी और पीड़ित को न्याय मिल पाएगा। - सीताराम नाटानी