- साप्ताहिक गतिविधि के समापन पर कार्यशाला का आयोजन भिंड (ईएमएस)| प्रधानमंत्री कॉलेजेस ऑफ़ एक्सीलेंस बंद में विश्व जल दिवस और विश्व पृथ्वी दिवस 2026 की साप्ताहिक गतिविधि के समापन अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ.आर.ए.शर्मा और स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो.मोहित कुमार दुबे के मार्गदर्शन और निर्देशन में कार्यक्रम का आयोजन म.प्र.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल के सौजन्य सेकिया गया जिसमें मुख्य वक्ता में प्रो इकबाल अली चौधरी दिलीप सिंह कन्या महाविद्यालय भिंड, डॉ दिनेश प्रताप सिंह बैंस, प्रभारी प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय फूफ और डॉ.हेमंत दुबे, शासकीय जे एस स्नातकोतर महाविद्यालय भिंड उपस्थित रहें। सर्वप्रथम कार्यशाला का शुभारम मां सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्वलित और पुष्प अर्पित कर किया गया इसी के उपरांत महाविद्यालय छात्रा संजना यादव के द्वारा सरस्वती वंदना का गायन किया गया। इसके पुराने विद्यालय स्टाफ द्वारा मानचित्र अतिथियों और प्राचार्य का सम्मान पोस्टमाला पहनकर किया गया है इसके उपरांत प्रथम वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ.दिनेश प्रताप सिंह बताया ने बताया विश्व जल दिवस जिसे हर वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है किस दिन की शुरुआत 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई जब संयुक्त राष्ट्र ने विश्व भर में जल संरक्षण और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया जल केवल एक संसाधन नहीं यह जीवन का सार है हमारे शरीर का लगभग 60ः भाग जल से बना है पृथ्वी उपलब्ध कुल जल में से लगभग 97ः जल का रहा है जो समुद्र में है विशेष 3ः मीठे जल में से भी अधिकांश ग्लेशियरों और हिमखंडों में जमा है। मानव उपयोग के लिए उपलब्ध जल मात्र एक प्रतिशत से भी काम है जिस पर लगभग 10 अरब से अधिक लोग जीवन निर्भर हैं आज भी विश्व में लगभग दो अरब लोग सुरक्षित पेयजल से वंचित है। डॉ हेमंत दुबे ने बताया हर वक्त लाखों लोग दूषित पेयजल के कारण होने वाली बीमारियों से भी पीड़ित है जल को हम व्यर्थ बहा देते हैं वही किसी और के लिए जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन सकता है। विश्व जल दिवस और विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का उद्देश्य केवल औपचारिकता नही है, इसका मूल उद्देश्य जल के महत्व को समझना जल संकट के प्रति चेतना जगाना और आने वाली पीढियां के लिए जल संरक्षण का संकल्प लेना आज जलवायु परिवर्तन का नियंत्रित शहरीकरण भूजल का अत्यधिक दोहन और नदियों का प्रदूषण हमारे सामने गंभीर चुनौतियां बनकर खड़े हैं हमारे देश भारत में भी व्यक्ति चिंता जनक है राज्यों में व्यवस्था तेजी से गिर रहा है गांव में कुए तालाब सूख रहे हैं। डॉ इकबाल अली ने विद्यार्थियों को जल संरक्षण और विश्व पृथ्वी दिवस की मेहता उनके शब्दों की व्याख्या के द्वारा समझाया उन्होंने पृथ्वी के शब्द म्।त्ज्भ् की की व्याख्या छत्तीसगढ़ पावक गगन समीरा पंच रत्न से बना शरीरा से की अलग-अलग अक्षरों को जल पृथ्वी अग्नि वायु और आकाश से की वह बताया कि मनुष्य की प्रतिक्रिया जल से ही जुड़ी है जन्म से लेकर मित्र तक व्यक्ति जल से ही जोड़ा है उसका जन्म स्नान से किया जाता है और मृत्यु पर भी उसे जल से ही तर्पण कर त्रियांजलि दी जाती हैं डॉ अली शर्मा बताया गंगा जमुना नर्मदा गोदावरी आस्था हमारी पहचान है तो अपने ही अस्तित्व को संकट में डालेंगे आज आवश्यकता है सामूहिक संकल्प की महाविद्यालय में विद्यार्थियों को जल संकल्प का पाठ पढ़ाया जाए उद्योगों में जल के पुनर्चक्रण की व्यवस्था हो किसानों को आधुनिक तकनीक से सिंचाई जैसे ड्रिप और स्प्रिंकल का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। महाविद्यालय प्राचार्य डॉक्टर आरडी शर्मा ने बताया नल से गिनती पानी की बूंद केवल पानी की बूंद नहीं बारिश की बूंद है जब भी वर्ष की पहली हुआ जाति को छुए तो उसे वक्त बहने ना दें उसे समझो ना क्योंकि वही बूंद कल किसी की प्यास हो जाएगी कार्यक्रम के समापन पर सभी साप्ताहिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रमाण पत्र वितरित किए गए और कार्यक्रम का संचालन प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो.मोहित कुमार दुबे द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा पोस्टर तथा रंगोली के द्वारा जल संरक्षण पृथ्वी संरक्षण और लैंगिक समानता का एक संदेश दिया गया।कार्यक्रम की समाप्ति पर जल संरक्षण और पृथ्वी संरक्षण हेतु शपथ ग्रहण की गई इस अवसर पर समस्या महाविद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।