-यह भारी पत्थर लोगों की आस्था का केंद्र, प्रभु राम की शक्ति का मानते हैं प्रतीक हैदराबाद,(ईएमएस)। हैदराबाद के लंगर हौज, बापू घाट के पास स्थित करीब 800 साल पुराना संगम रामचंद्रजी मठ एक अद्भुत और रहस्यमयी स्थल है। इस प्राचीन मठ में एक ऐसा भारी पत्थर बीते कई दशकों से पानी के कुंड में तैर रहा है, जिसे देखने के दूर-दूर से लोग आते हैं। यह दृश्य सचमुच अविश्वसनीय है और लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है कि आखिर यह कैसे संभव है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर के प्रांगण में लोहे की जाली से घिरा एक छोटा सा जलकुंड है, जिसमें यह रहस्यमयी पत्थर सावधानी से रखा गया है। खास बात यह है कि इतना भारी होने के बावजूद यह पत्थर पानी में डूबता नहीं है, बल्कि उसकी सतह पर स्थिरता से तैरता रहता है। यह चमत्कारी दृश्य रामायण काल की याद दिलाता है, जब नल और नील की वानर सेना ने भगवान श्रीराम के आदेश पर रामसेतु के निर्माण में पत्थरों को पानी पर तैराया था। मंदिर के पुजारी और भक्तगण दृढ़ता से मानते हैं कि यह पत्थर उसी अलौकिक आस्था और प्रभु राम की शक्ति का प्रतीक है। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक भूवैज्ञानिक घटना नहीं, बल्कि प्रभु राम की जीवंत उपस्थिति का साक्षात प्रमाण है, जो उनके विश्वास को और भी गहरा करता है। हैदराबाद के इस मंदिर की एक और अद्वितीय विशेषता इसे और भी खास बनाती है। यहां भगवान श्रीराम की प्रतिमा मूंछों के साथ स्थापित है, जो भारतीय मंदिरों में अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यह स्वरूप उस समय का प्रतीक है जब प्रभु राम अपने परम भक्त रामदास को सुल्तान तानीशाह की कैद से मुक्त कराने आए थे। उस समय उन्होंने एक युवा सिपाही का रूप धारण किया था और उसी स्वरूप की स्मृति में यहां मूंछों वाले राम की पूजा की जाती है। यह मंदिर कर्ज मुक्ति राम मंदिर के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि यहां प्रार्थना करने से उनकी आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं। रिपोरट में मंदिर के महंतों और लोगों ने बताया कि जो व्यक्ति आर्थिक तंगी या कर्ज के बोझ से अत्यधिक परेशान होता है, यदि वह पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां आकर लगातार शुक्रवार और शनिवार को मंदिर की 21 परिक्रमा करता है, तो उसकी समस्याओं में चमत्कारिक रूप से राहत मिलती है और उसे कर्ज से मुक्ति मिलती है। इस गहन आस्था के कारण बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए यहां दर्शन और परिक्रमा करने आते हैं। मुचकुंडा नदी के तट पर स्थित यह प्राचीन मठ आज भी अपने अंदर आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक रहस्य समेटे हुए है। विज्ञान भले ही इसे पत्थर की विशिष्ट संरचना या घनत्व का परिणाम बताए, लेकिन यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था और विश्वास का उदाहरण है। सिराज/ईएमएस 23 अप्रैल 2026