राष्ट्रीय
23-Apr-2026
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अब इस मामले में अंतिम फैसले के लिए बड़ी पीठ का हो सकता है गठन गुवाहाटी,(ईएमएस)। गुवाहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा खंडपीठ ने नगालैंड में डॉग मीट के व्यापार और बिक्री पर रोक से जुड़े मामलों में विभाजित फैसला सुनाया। दो जजों की खंडपीठ अलग-अलग राय पर पहुंची, जिसके चलते अब इस मामले में अंतिम फैसले के लिए बड़ी पीठ के गठन की संभावना है। एक जज ने इस कुत्‍ते के मांस का समर्थन किया तो दूसरे ने इसके खिलाफ में फैसला दिया। यह मामला दो रिट याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें एक याचिका वर्ष 2023 में दायर की थी, जबकि दूसरी 2024 में दाखिल की गई थी। इन याचिकाओं में जून 2023 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें हाईकोर्ट ने नागालैंड सरकार के 2020 के प्रतिबंध आदेश को निरस्त कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 22 अप्रैल 2026 को सुनाए गए फैसले में जस्टिस बुदी हाबुंग ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इनमें कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने साल 2023 के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें डॉग मीट की बिक्री और उपभोग की अनुमति दी गई थी। दूसरी ओर जस्टिस रॉबिन फुकन ने अलग रुख अपनाते हुए याचिकाओं को स्वीकार कर लिया और 2023 के फैसले को निरस्त कर दिया। इस प्रकार दोनों जजों के बीच मतभेद के कारण मामला बिना स्‍पष्‍ट फैसले के रह गया है। इस मामले में विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है। बता दें नगालैंड सरकार ने जुलाई 2020 में एक अधिसूचना जारी कर कुत्तों के व्यावसायिक आयात, उनके व्यापार, बाजारों और डॉग मीट की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। यह फैसला राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद लागू किया गया था। हालांकि, इस फैसले को लेकर समाज में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। नगालैंड के कई समुदायों में डॉग मीट को पारंपरिक भोजन और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानते हैं, जबकि दूसरी ओर पशु अधिकार संगठनों और कुछ वर्गों ने इसका विरोध किया था। इसी विवाद के बीच सितंबर 2020 में डॉग मीट के व्यापार से जुड़े लाइसेंसधारी कारोबारियों ने इस प्रतिबंध को कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद 2 जून 2023 को कोहिमा खंडपीठ ने राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया था। उस समय न्यायमूर्ति मार्ली वानकुन ने अपने फैसले में कहा था कि मुख्य सचिव को इस प्रकार का प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि फूड एक्ट के तहत खाद्य सुरक्षा आयुक्त को इस संबंध में अधिकार प्राप्त है। अब ताजा विभाजित फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर कानूनी जटिलता में फंस गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर अंतिम स्पष्टता के लिए अब बड़ी पीठ का फैसला अहम होगा। सिराज/ईएमएस 23अप्रैल26 ---------------------------------