श्योपुर (ईएमएस)| कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा के मार्गदर्शन में बुधवार को पृथ्वी दिवस के अवसर पर शासकीय पीजी कॉलेज एवं शासकीय आदर्श कन्या महाविद्यालय श्योपुर के संयुक्त तत्वावधान में “जल संरक्षण और पृथ्वी का भविष्य” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. ओपी शर्मा ने अपने उद्बोधन में पृथ्वी दिवस के इतिहास और इसके प्रारंभिक कारणों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पृथ्वी दिवस की शुरुआत वर्ष 1979 में हुई थी तथा इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे पर्यावरणीय प्रयासों के माध्यम से पृथ्वी को सुरक्षित रखने का संकल्प लेना चाहिए। डॉ. रमेश भारद्वाज ने जल संरक्षण, जल उपलब्धता और पृथ्वी दिवस के बीच गहरे संबंधों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और यदि समय रहते जल संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने वर्षा जल संचयन, जल का संतुलित उपयोग तथा पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम के अंतिम वक्ता डॉ. अजीत सिंह ने जल संरक्षण के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल की रासायनिक महत्ता, भूजल की वर्तमान स्थिति तथा श्योपुर क्षेत्र में भूगर्भीय जल स्तर में हो रहे परिवर्तनों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनियंत्रित दोहन के कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, जो आने वाले समय में गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। साथ ही उन्होंने जल के सतत उपयोग और संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा चौकसे द्वारा किया गया, इस अवसर पर कॉलेज के शैक्षणिक स्टाफ में डॉ. मनीष सैनी, डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. सुभाष चंद, डॉ. विपिन बिहारी शर्मा, डॉ. नरेन्द्र सिंह जाट, डॉ. करण सिंह सैनी, डॉ. परवीन वर्मा डॉ. भूपेंद्र हरदेनिया, डॉ. आसिफ कुरैशी, डॉ. तुफैल अहमद, डॉ. बबली मलिक सहित अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। संगोष्ठी के अंत में उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक रहने का संदेश दिया गया।