क्षेत्रीय
23-Apr-2026
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- दिल्ली में तैयार हुई राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा, मांगें पूरी न होने पर राजधानी में आमरण अनशन करेंगे देशभर के गौसेवक :: इंदौर (ईएमएस)। भारतीय जनमानस की अटूट आस्था की प्रतीक और सांस्कृतिक अस्मिता की आधारशिला गौमाता को संवैधानिक मान दिलाने के लिए संत समाज ने अब आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में राष्ट्रव्यापी गौसेवा अभियान की रूपरेखा तय की गई है, जिसके अंतर्गत आगामी 27 अप्रैल को संपूर्ण देश में गो सम्मान दिवस मनाया जाएगा। संतों ने उद्घोष किया है कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल या संगठन के बैनर तले नहीं, बल्कि साक्षात गौमाता और नंदी महाराज के दिव्य सानिध्य में संचालित होगा। इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कृष्णायन गौशाला हरिद्वार के अच्युतानंद महाराज एवं गोपालाचार्य गोपालानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि गौ संरक्षण अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु सशक्त केंद्रीय कानून बनाया जाए और गौतस्करी में लिप्त अपराधियों के लिए आजीवन कारावास जैसा कठोर दंड सुनिश्चित हो। संतों ने गौवंश को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में गोबर व गोमूत्र आधारित अनुसंधान हेतु विश्वविद्यालयों की स्थापना और सरकारी भवनों में गौ-उत्पादों के अनिवार्य उपयोग का प्रस्ताव भी शासन के समक्ष रखा है। इसके साथ ही गौशालाओं को मनरेगा से जोड़ने और विद्युत शुल्कों में छूट देने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई गई है। :: छह करोड़ हस्ताक्षरों से जगाएंगे सरकार को :: आंदोलन की रणनीति साझा करते हुए संतों ने बताया कि वर्ष 2026 की शुरुआत से व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके पश्चात, अप्रैल माह में देश की सभी 5410 तहसीलों से लगभग छह करोड़ हस्ताक्षरों के साथ राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को प्रार्थना पत्र सौंपे जाएंगे। संतों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इन न्यायोचित मांगों पर शासन द्वारा अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए, तो फरवरी 2027 में राजधानी दिल्ली संतों के विशाल समागम की साक्षी बनेगी। वहां आयोजित होने वाला शांतिपूर्ण संकीर्तन यदि निष्फल रहा, तो संत समाज राष्ट्रहित और गौ-हित में केवल गंगाजल ग्रहण कर आमरण अनशन का मार्ग अपनाएगा। यह संपूर्ण अनुष्ठान पूर्णतः अहिंसक होगा, जिसका एकमात्र ध्येय गौवंश की गरिमा को पुनर्स्थापित करना है। प्रकाश/23 अप्रैल 2026